गवरी, नृत्य-नाटिका का सम्बन्ध किस राज्य से है?
गवरी, नृत्य-नाटिका का सम्बन्ध राजस्थान से है। भारत की लोक-संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्ट परंपराएँ, लोककथाएँ, नृत्य और नाट्य-रूप हैं जो वहाँ के सामाजिक और धार्मिक जीवन को अभिव्यक्त करते हैं। राजस्थान की धरती पर भी अनेक लोकनृत्य और लोकनाट्य प्रचलित हैं जिनमें गवरी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। गवरी एक ऐसी नृत्य-नाटिका है जिसका संबंध मुख्यतः राजस्थान के भील समुदाय से है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। गवरी का आयोजन वर्षा ऋतु के पश्चात् श्रावण और भाद्रपद मास में किया जाता है। यह लगभग 40 दिनों तक चलने वाला एक धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान है। इसमें कलाकार गाँव-गाँव जाकर विभिन्न पौराणिक कथाओं का मंचन करते हैं। गवरी का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि गवरी का संबंध राजस्थान के मेवाड़ अंचल से माना जाता है। उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और डूंगरपुर जिलों में यह परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। गवरी की उत्पत्ति के विषय में विभिन्न लोककथाएँ प्रचलित हैं। भील समुदाय इसे भगवान शिव और देवी पार्वती की आर…