मोहिनीअट्टम में हाथ के इशारे जो मुख्य रूप से हस्तलक्षण दीपिका पाठ से अपनाए गए, वे कितने हैं?

मोहिनीअट्टम में हाथ के इशारे जो मुख्य रूप से हस्तलक्षण दीपिका पाठ से अपनाए गए, वे कितने हैं?
मोहिनीअट्टम में हाथ के इशारे जो मुख्य रूप से हस्तलक्षण दीपिका पाठ से अपनाए गए, वे 24 हैं। भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा में हाथ के इशारे (हस्तमुद्राएँ) केवल सजावटी तत्व नहीं हैं बल्कि वे संपूर्ण अभिव्यक्ति-तंत्र की आत्मा हैं। चेहरे के भाव (मुखाभिनय), नेत्रों की चंचलता, भौहों का उतार-चढ़ाव और शरीर की लयात्मक गति इन सबके साथ हाथों की मुद्राएँ मिलकर नृत्य को कथात्मक और भावपूर्ण बनाती हैं। केरल की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य शैली मोहिनीअट्टम में हस्तमुद्राओं का विशेष महत्व है। मोहिनीअट्टम की हस्तमुद्राएँ मुख्यतः हस्तलक्षण दीपिका नामक ग्रंथ से ग्रहण की गई हैं। इस ग्रंथ में वर्णित 24 मूल हस्तमुद्राएँ मोहिनीअट्टम में प्रयोग की जाती हैं। ये 24 हस्तमुद्राएँ न केवल वस्तुओं और विचारों का संकेत देती हैं बल्कि भावों, संबंधों, प्रकृति और दार्शनिक अवधारणाओं को भी व्यक्त करती हैं। मोहिनीअट्टम की पृष्ठभूमि मोहिनीअट्टम का उद्भव केरल में हुआ। “मोहिनी” का अर्थ है मोहिनी स्वरूप धारण करने वाली और “अट्टम” का अर्थ है नृत्य। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण कर असुरों को मोह…

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