दूध एक आदर्श आहार है लेकिन इसमें किन तत्वों की कमी होती है?

Sanjay Yadav
दूध एक आदर्श आहार है लेकिन इसमें आयरन एवं कॉपर तत्वों की कमी होती है। दूध को प्राचीन काल से ही “संपूर्ण आहार” या “आदर्श आहार” कहा जाता रहा है। शिशु के जन्म के बाद उसका पहला और सबसे महत्वपूर्ण भोजन माँ का दूध होता है। इसके बाद भी जीवन के प्रत्येक चरण बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था में दूध का विशेष महत्व बना रहता है। दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन A, D, B₂ (राइबोफ्लेविन), B₁₂ तथा ऊर्जा प्रदान करने वाले कार्बोहाइड्रेट (लैक्टोज) पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

इन्हीं गुणों के कारण दूध को आदर्श आहार की संज्ञा दी जाती है। किंतु यह भी सत्य है कि दूध सभी पोषक तत्वों की दृष्टि से पूर्ण नहीं है। विशेष रूप से इसमें आयरन (लौह) और कॉपर (तांबा) तत्वों की मात्रा बहुत कम होती है। यही कारण है कि केवल दूध पर निर्भर रहने से विशेषकर बच्चों में, आयरन की कमी (एनीमिया) का खतरा बढ़ सकता है।

दूध एक आदर्श आहार है लेकिन इसमें आयरन एवं कॉपर तत्वों की कमी होती है।

इस पोस्ट में हम दूध के पोषण मूल्य, उसके लाभ, आयरन एवं कॉपर की कमी के कारण, उनके प्रभाव तथा संतुलित आहार में दूध की भूमिका का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

दूध का पोषणीय महत्व

दूध एक जटिल जैविक द्रव है जिसमें अनेक आवश्यक पोषक तत्व संतुलित अनुपात में पाए जाते हैं।

प्रोटीन
  • दूध में मुख्यतः दो प्रकार के प्रोटीन पाए जाते हैं कैसीन और व्हे प्रोटीन। ये शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत और एंजाइम व हार्मोन निर्माण में सहायक होते हैं।
वसा
  • दूध की वसा ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। बच्चों के मस्तिष्क विकास में दूध की वसा का विशेष योगदान होता है।
कार्बोहाइड्रेट
  • लैक्टोज दूध का मुख्य कार्बोहाइड्रेट है जो ऊर्जा प्रदान करता है तथा कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।
खनिज लवण
  • दूध कैल्शियम का अत्यंत समृद्ध स्रोत है। इसके अलावा फॉस्फोरस, पोटैशियम और मैग्नीशियम भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
विटामिन
  • दूध में विटामिन A, D, B₂ और B₁₂ की अच्छी मात्रा होती है जो दृष्टि, हड्डियों, तंत्रिका तंत्र और रक्त निर्माण में सहायक हैं।
इन सभी गुणों के कारण दूध को संतुलित आहार का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।

दूध को आदर्श आहार क्यों कहा जाता है?

दूध को आदर्श आहार कहने के पीछे कई कारण हैं:
  • यह आसानी से पचने योग्य है।
  • इसमें वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व मौजूद हैं।
  • बच्चों, रोगियों और वृद्धों के लिए उपयुक्त है।
  • हड्डियों और दांतों के विकास में सहायक है।
  • शरीर को ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है।
शिशु अवस्था में माँ का दूध तो पूर्ण आहार माना जाता है क्योंकि उसमें आयरन की मात्रा भले कम हो लेकिन उसका अवशोषण अत्यंत प्रभावी होता है।

दूध में आयरन की कमी

आयरन का महत्व
  • आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन निर्माण के लिए आवश्यक है। हीमोग्लोबिन रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन करता है। आयरन की कमी से एनीमिया (रक्ताल्पता) हो जाती है।
दूध में आयरन की मात्रा
  • गाय या भैंस के दूध में आयरन की मात्रा अत्यंत कम (लगभग 0.1 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम) होती है। यह मात्रा शरीर की दैनिक आवश्यकता की तुलना में बहुत कम है।
परिणाम
  • यदि बच्चा लंबे समय तक केवल दूध पर निर्भर रहे और उसे आयरन युक्त पूरक आहार न मिले तो उसमें एनीमिया विकसित हो सकता है। इसके लक्षण हैं:
    • कमजोरी
    • थकान
    • पीली त्वचा
    • ध्यान की कमी
    • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी

दूध में कॉपर की कमी

कॉपर का महत्व
  • कॉपर (तांबा) शरीर में एंजाइम क्रियाओं, आयरन के उपयोग, तंत्रिका तंत्र और हड्डियों के विकास में सहायक है।
दूध में कॉपर की मात्रा
  • दूध में कॉपर भी बहुत कम मात्रा में पाया जाता है।
परिणाम
  • कॉपर की कमी से निम्न समस्याएँ हो सकती हैं:
    • आयरन के सही उपयोग में बाधा
    • हड्डियों की कमजोरी
    • बालों का झड़ना
    • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी

केवल दूध पर निर्भरता के खतरे

विशेष रूप से 6 माह के बाद बच्चों को केवल दूध देना पर्याप्त नहीं होता। इस आयु के बाद ठोस एवं आयरन-समृद्ध आहार देना आवश्यक है। यदि बच्चा 1–2 वर्ष तक अत्यधिक मात्रा में दूध पीता रहे और अन्य आहार न ले तो आयरन की कमी का खतरा बढ़ जाता है।

संतुलित आहार में दूध की भूमिका

दूध को पूरी तरह त्यागने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना चाहिए।

आयरन के स्रोत
  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ
  • दालें
  • गुड़
  • सूखे मेवे
  • अनाज
कॉपर के स्रोत
  • मेवे
  • बीज
  • साबुत अनाज
  • दालें
दूध के साथ इन खाद्य पदार्थों को शामिल करने से पोषण संतुलित रहता है।

शिशु आहार में सावधानियाँ

  • 6 माह तक केवल माँ का दूध।
  • 6 माह बाद पूरक आहार की शुरुआत।
  • आयरन-समृद्ध खाद्य पदार्थों का समावेश।
  • अत्यधिक दूध सेवन से बचाव।

सार्वजनिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण

भारत जैसे देश में एनीमिया एक गंभीर समस्या है। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के अनुसार बच्चों और महिलाओं में आयरन की कमी व्यापक है। दूध को आदर्श आहार मानकर यदि अन्य पोषक तत्वों की अनदेखी की जाए तो पोषण असंतुलन हो सकता है। इसलिए पोषण शिक्षा आवश्यक है।

इस प्रश्न का महत्व

सामान्य विज्ञान, पोषण विज्ञान और स्वास्थ्य संबंधी प्रतियोगी परीक्षाओं में दूध के पोषण मूल्य से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। किंतु यह जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि दूध पूर्ण रूप से संपूर्ण आहार नहीं है क्योंकि इसमें आयरन (लौह) और कॉपर (तांबा) तत्वों की मात्रा बहुत कम होती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे SSC, रेलवे, बैंकिंग, राज्य स्तरीय परीक्षाएँ, पुलिस, शिक्षक भर्ती तथा अन्य सामान्य ज्ञान परीक्षाओं में अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि “दूध में किस तत्व की कमी होती है?” या “दूध में कौन-सा खनिज पर्याप्त मात्रा में नहीं पाया जाता?” इसका सही उत्तर है आयरन एवं कॉपर। कई बार विकल्पों में कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन, आयरन आदि दिए जाते हैं जहाँ विद्यार्थी भ्रमित हो सकते हैं क्योंकि दूध कैल्शियम से भरपूर होता है लेकिन आयरन की कमी होती है।

सामान्य ज्ञान (GK) की दृष्टि से यह तथ्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षाओं में अक्सर “दूध पूर्ण आहार है परंतु इसमें किस तत्व का अभाव है?” जैसे प्रत्यक्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। कई बार इसे कथन-तर्क (Assertion-Reason) या सही/गलत प्रकार के प्रश्नों में भी शामिल किया जाता है।

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