शेलिंग प्रतिशत (Shelling percentage) मूंगफली की गुणवत्ता जानने का एक आधार (Parameter) है। शेलिंग प्रतिशत से क्या ज्ञात किया जाता है?

Sanjay Yadav
शेलिंग प्रतिशत से मूंगफली में दानों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में तिलहनी फसलों का विशेष महत्व है। इन तिलहनी फसलों में मूंगफली (Groundnut) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। मूंगफली न केवल खाद्य तेल का प्रमुख स्रोत है बल्कि यह प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर एक पौष्टिक आहार भी है। मूंगफली की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए विभिन्न मानकों (Parameters) का उपयोग किया जाता है जिनमें शेलिंग प्रतिशत (Shelling Percentage) एक अत्यंत महत्वपूर्ण मापदंड है।

शेलिंग प्रतिशत से यह ज्ञात किया जाता है कि मूंगफली के कुल भार में से कितने प्रतिशत भाग दानों (Kernels) का है और कितना भाग छिलके (Shell) का है। यह मापदंड किसान, व्यापारी, प्रसंस्करण उद्योग तथा निर्यातकों सभी के लिए उपयोगी होता है।

शेलिंग प्रतिशत से मूंगफली में दानों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है।

मूंगफली का परिचय

मूंगफली एक प्रमुख तिलहनी फसल है जिसे वैज्ञानिक रूप से Arachis hypogaea कहा जाता है। यह मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाती है। भारत में गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

मूंगफली की खेती खरीफ और रबी दोनों मौसमों में की जाती है। इसका उपयोग तेल उत्पादन, नमकीन, मिठाइयों, मूंगफली मक्खन, चटनी तथा पशु आहार के रूप में होता है।

शेलिंग प्रतिशत की परिभाषा

शेलिंग प्रतिशत वह अनुपात है जो बताता है कि मूंगफली के कुल भार में से दानों का प्रतिशत कितना है।

सरल शब्दों में:
  • यदि 100 ग्राम मूंगफली ली जाए और उसमें से छिलका हटाने पर 70 ग्राम दाने प्राप्त हों तो शेलिंग प्रतिशत 70% होगा।
इसका सूत्र इस प्रकार है:

शेलिंग प्रतिशत

शेलिंग प्रतिशत का महत्व

गुणवत्ता निर्धारण में सहायक
  • शेलिंग प्रतिशत मूंगफली की गुणवत्ता का प्रत्यक्ष संकेतक है। उच्च शेलिंग प्रतिशत का अर्थ है कि मूंगफली में दानों की मात्रा अधिक है और छिलका कम है।
बाजार मूल्य पर प्रभाव
  • व्यापारी और खरीद एजेंसियां शेलिंग प्रतिशत के आधार पर मूल्य तय करती हैं। अधिक प्रतिशत वाली मूंगफली को अधिक कीमत मिलती है।
तेल उत्पादन में उपयोगिता
  • तेल मिलों के लिए शेलिंग प्रतिशत अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिक दानों का अर्थ है अधिक तेल उत्पादन।
निर्यात गुणवत्ता
  • निर्यात के लिए भेजी जाने वाली मूंगफली में उच्च शेलिंग प्रतिशत वांछनीय होता है।
बीज चयन
  • किसान बेहतर किस्मों के चयन के लिए शेलिंग प्रतिशत को ध्यान में रखते हैं।

शेलिंग प्रतिशत को प्रभावित करने वाले कारक

किस्म (Variety)
  • मूंगफली की अलग-अलग किस्मों में शेलिंग प्रतिशत भिन्न होता है। कुछ उन्नत किस्में 70–75% तक शेलिंग प्रतिशत देती हैं।
मिट्टी की गुणवत्ता
  • उपजाऊ एवं संतुलित पोषक तत्वों वाली मिट्टी में उगाई गई फसल में दानों का विकास अच्छा होता है।
सिंचाई प्रबंधन
  • अत्यधिक या अपर्याप्त सिंचाई दानों के विकास को प्रभावित कर सकती है।
उर्वरक प्रबंधन
  • नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग दानों की वृद्धि में सहायक होता है।
रोग एवं कीट प्रकोप
  • यदि फसल पर कीट या रोग का प्रकोप हो तो दानों का विकास प्रभावित होता है और शेलिंग प्रतिशत कम हो सकता है।
कटाई का समय
  • समय से पहले या देर से कटाई करने पर दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

शेलिंग प्रतिशत की गणना की विधि

  • मूंगफली का एक निश्चित नमूना (Sample) लें।
  • उसका कुल भार तौलें।
  • सभी मूंगफलियों के छिलके अलग करें।
  • केवल दानों का भार तौलें।
  • उपरोक्त सूत्र से प्रतिशत निकालें।
यह प्रक्रिया प्रयोगशाला तथा खेत स्तर पर आसानी से की जा सकती है।

शेलिंग प्रतिशत और दाना गुणवत्ता

उच्च शेलिंग प्रतिशत केवल दानों की मात्रा ही नहीं दर्शाता बल्कि यह दानों की परिपक्वता और आकार का भी संकेत देता है।
  • बड़े एवं स्वस्थ दाने → उच्च शेलिंग प्रतिशत
  • छोटे एवं अपूर्ण दाने → कम शेलिंग प्रतिशत

शेलिंग प्रतिशत और तेल प्रतिशत का संबंध

सामान्यतः अधिक शेलिंग प्रतिशत वाली मूंगफली में तेल की मात्रा भी अधिक पाई जाती है। हालांकि यह आवश्यक नहीं कि हर बार ऐसा ही हो क्योंकि तेल प्रतिशत दानों की आंतरिक संरचना पर भी निर्भर करता है।

भारत में मूंगफली की प्रमुख किस्में और शेलिंग प्रतिशत

भारत में विकसित कई उन्नत किस्में उच्च शेलिंग प्रतिशत देती हैं। जैसे:
  • GG-20
  • JL-24
  • TAG-24
  • ICGV श्रृंखला
इन किस्मों का शेलिंग प्रतिशत 65% से 75% तक हो सकता है।

प्रसंस्करण उद्योग में शेलिंग प्रतिशत का महत्व

मूंगफली प्रसंस्करण उद्योग में शेलिंग प्रतिशत का सीधा संबंध लाभ से है।
  • अधिक दाने → अधिक उत्पादन
  • कम अपशिष्ट → कम लागत
  • बेहतर गुणवत्ता → अधिक मांग
तेल उद्योग, नमकीन उद्योग तथा मूंगफली मक्खन उद्योग सभी इस पैरामीटर पर निर्भर करते हैं।

अनुसंधान और सुधार

कृषि वैज्ञानिक नई किस्मों के विकास में शेलिंग प्रतिशत को प्राथमिकता देते हैं। जैव प्रौद्योगिकी और पारंपरिक संकरण तकनीकों से ऐसी किस्में विकसित की जा रही हैं जिनमें उच्च उपज और अधिक शेलिंग प्रतिशत हो।

किसानों के लिए सुझाव

  • प्रमाणित बीजों का चयन करें।
  • संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें।
  • समय पर सिंचाई करें।
  • रोग एवं कीट नियंत्रण पर ध्यान दें।
  • उचित समय पर कटाई करें।
इन उपायों से शेलिंग प्रतिशत में वृद्धि संभव है।

शेलिंग प्रतिशत और भंडारण

यदि मूंगफली का भंडारण उचित न हो तो दाने सिकुड़ सकते हैं या खराब हो सकते हैं जिससे शेलिंग प्रतिशत घट सकता है। इसलिए:
  • नमी नियंत्रित रखें
  • हवादार स्थान में भंडारण करें
  • कीटरोधी उपाय अपनाएं

आर्थिक दृष्टि से महत्व

उच्च शेलिंग प्रतिशत किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है। व्यापारी अधिक प्रतिशत वाली मूंगफली को प्राथमिकता देते हैं। इससे राष्ट्रीय स्तर पर तिलहन उत्पादन और तेल आयात में कमी लाई जा सकती है।

इस प्रश्न का महत्व

शेलिंग प्रतिशत (Shelling Percentage) मूंगफली की गुणवत्ता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मापदंड है और प्रतियोगी परीक्षाओं तथा सामान्य ज्ञान (GK) की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। शेलिंग प्रतिशत से यह ज्ञात किया जाता है कि मूंगफली के कुल भार में से दानों (Kernels) का प्रतिशत कितना है और छिलके (Shell) का भाग कितना है। 

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे कृषि, कृषि विज्ञान, खाद्य प्रौद्योगिकी, ग्रामीण विकास, कृषि विस्तार, कृषि विपणन तथा राज्य स्तरीय एवं केंद्रीय सेवाओं की परीक्षाओं में फसलों की गुणवत्ता के मानकों से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। ऐसे में शेलिंग प्रतिशत एक महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में सामने आता है। यह केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं बल्कि व्यावहारिक कृषि अर्थशास्त्र से भी जुड़ा हुआ है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में “तिलहनी फसलों की गुणवत्ता के मानक” या “तेल उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारक” जैसे प्रश्नों में शेलिंग प्रतिशत का उल्लेख महत्वपूर्ण हो सकता है।

कृषि विज्ञान में शेलिंग प्रतिशत से फसल की किस्म की गुणवत्ता का भी पता चलता है। उन्नत किस्में सामान्यतः अधिक शेलिंग प्रतिशत देती हैं। इसलिए अनुसंधान संस्थान नई किस्मों के विकास में इस पैरामीटर को प्रमुखता देते हैं। यह तथ्य कृषि से संबंधित परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि किस प्रकार किसी फसल की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है। मूंगफली के संदर्भ में शेलिंग प्रतिशत इसका सीधा उत्तर है।

सामान्य ज्ञान की दृष्टि से यह जानना आवश्यक है कि शेलिंग प्रतिशत मूंगफली में दानों का प्रतिशत ज्ञात करने का मापदंड है। इसे इस सूत्र से निकाला जाता है — दानों का भार ÷ कुल मूंगफली का भार × 100। यह एक वस्तुनिष्ठ और सरल गणना है इसलिए परीक्षाओं में इससे संबंधित संख्यात्मक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।

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