ध्वनि क्या है?
ध्वनि एक प्रकार की यांत्रिक तरंग है जो किसी माध्यम (जैसे वायु, जल या ठोस) में कणों के कंपन के कारण उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु कंपन करती है तो उसके आस-पास के माध्यम के कण भी कंपन करने लगते हैं। यह कंपन एक कण से दूसरे कण तक स्थानांतरित होता है और इसी प्रक्रिया को हम ध्वनि तरंग के रूप में अनुभव करते हैं।
ध्वनि की मुख्य विशेषताएँ
ध्वनि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- आवृत्ति (Frequency) – ध्वनि का तीखापन या भारीपन
- आयाम (Amplitude) – ध्वनि की तीव्रता
- वेग (Velocity) – ध्वनि के चलने की गति
- तीव्रता (Intensity) – प्रति इकाई क्षेत्र में ध्वनि ऊर्जा
ध्वनि के तेज़ या धीमे होने का संबंध मुख्यतः उसकी तीव्रता से होता है और तीव्रता को ही हम डेसीबल में मापते हैं।
ध्वनि की तीव्रता क्या है?
ध्वनि की तीव्रता से तात्पर्य उस ऊर्जा की मात्रा से है जो ध्वनि तरंगों द्वारा प्रति सेकंड प्रति वर्ग मीटर क्षेत्रफल में प्रवाहित होती है।
सरल शब्दों में:
- धीमी आवाज़ → कम तीव्रता
- तेज़ आवाज़ → अधिक तीव्रता
लेकिन समस्या यह है कि मानव कान बहुत ही विस्तृत सीमा में ध्वनियों को सुन सकता है। बहुत धीमी फुसफुसाहट से लेकर अत्यंत तेज़ विस्फोट तक। इसीलिए ध्वनि की तीव्रता को साधारण रैखिक पैमाने पर व्यक्त करना कठिन हो जाता है।
डेसीबल (Decibel) क्या है?
डेसीबल (dB) ध्वनि की तीव्रता या ध्वनि स्तर को मापने की एक लघुगणकीय (Logarithmic) इकाई है।
डेसीबल की परिभाषा
डेसीबल वह इकाई है जिसके द्वारा किसी ध्वनि की तीव्रता की तुलना मानक संदर्भ ध्वनि तीव्रता से की जाती है। मानक संदर्भ तीव्रता (Standard Reference Intensity) वह न्यूनतम ध्वनि तीव्रता है जिसे सामान्य मानव कान सुन सकता है। इसका मान होता है:
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| Image: मानक संदर्भ तीव्रता (Standard Reference Intensity) का मान |
डेसीबल को लघुगणकीय इकाई क्यों कहा जाता है?
मानव कान ध्वनि को रेखीय (Linear) रूप में अनुभव नहीं करता बल्कि लघुगणकीय रूप में अनुभव करता है। अर्थात्:
- यदि ध्वनि की वास्तविक तीव्रता 10 गुना बढ़ जाए तो हमें वह केवल “कुछ अधिक तेज़” ही प्रतीत होती है न कि 10 गुना।
इसी कारण ध्वनि को मापने के लिए लघुगणकीय पैमाने की आवश्यकता होती है और यही पैमाना डेसीबल कहलाता है।
डेसीबल का गणितीय सूत्र
ध्वनि स्तर (Sound Level) को डेसीबल में व्यक्त करने का सूत्र है:
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| Image: डेसीबल का गणितीय सूत्र |
इस सूत्र से स्पष्ट है कि डेसीबल सीधी माप नहीं बल्कि तुलनात्मक माप है।
डेसीबल पैमाने की विशेषताएँ
- यह लघुगणकीय पैमाना है
- 0 डेसीबल का अर्थ “ध्वनि का अभाव” नहीं बल्कि न्यूनतम श्रव्य ध्वनि है
- 10 dB की वृद्धि → ध्वनि तीव्रता में 10 गुना वृद्धि
- 20 dB की वृद्धि → 100 गुना तीव्रता
- 30 dB की वृद्धि → 1000 गुना तीव्रता
विभिन्न ध्वनियों का डेसीबल स्तर
सबसे कम तीव्र ध्वनियों में श्वास की आवाज़ आती है जिसका स्तर लगभग 10 डेसीबल होता है। यह ध्वनि सामान्यतः बहुत पास होने पर ही सुनाई देती है और मानव कान पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके बाद फुसफुसाहट की ध्वनि आती है जिसका डेसीबल स्तर लगभग 20 से 30 dB के बीच होता है। शांत वातावरण में यह स्पष्ट सुनाई देती है और यह भी सुरक्षित श्रेणी में आती है।
दैनिक जीवन में सबसे सामान्य ध्वनि सामान्य बातचीत की होती है। बातचीत करते समय उत्पन्न ध्वनि का स्तर लगभग 50 से 60 डेसीबल होता है। यह स्तर मानव स्वास्थ्य के लिए सामान्य और सुरक्षित माना जाता है तथा लंबे समय तक संपर्क में रहने पर भी इससे श्रवण शक्ति को कोई हानि नहीं होती।
जैसे-जैसे ध्वनि का स्रोत अधिक शोरयुक्त होता है उसका डेसीबल स्तर भी बढ़ता जाता है। उदाहरण के लिए, व्यस्त सड़क पर वाहनों की आवाज़ का स्तर लगभग 70 से 80 डेसीबल तक पहुँच सकता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे शोर में रहता है तो उसे मानसिक तनाव और सुनने की क्षमता में धीरे-धीरे कमी महसूस हो सकती है।
इससे भी अधिक तीव्र ध्वनि मोटरसाइकिल की होती है जिसका स्तर लगभग 90 डेसीबल के आसपास होता है। यह ध्वनि यदि निरंतर और लंबे समय तक सुनी जाए तो यह कानों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है। इसी प्रकार लाउडस्पीकर से उत्पन्न ध्वनि का स्तर प्रायः 100 से 110 डेसीबल तक पहुँच जाता है जो स्पष्ट रूप से श्रवण क्षमता को नुकसान पहुँचा सकता है।
सबसे अधिक तीव्र ध्वनियों में जेट विमान की आवाज़ आती है। इसका डेसीबल स्तर लगभग 120 से 140 dB तक होता है। यह स्तर मानव कानों के लिए अत्यंत पीड़ादायक होता है और इसे दर्द की सीमा कहा जाता है। इतनी तीव्र ध्वनि के संपर्क में आने से कान के पर्दे को स्थायी क्षति भी पहुँच सकती है।
मानव कान और डेसीबल
मानव कान की सुनने की सीमा लगभग:
- 0 dB से 120 dB तक होती है
दर्द की सीमा
- लगभग 120 dB पर पहुँचने पर ध्वनि इतनी तीव्र हो जाती है कि वह कान में दर्द उत्पन्न करती है। इससे अधिक ध्वनि स्तर:
- श्रवण क्षमता को स्थायी नुकसान
- कान के पर्दे को क्षति
- मानसिक तनाव उत्पन्न कर सकता है।
ध्वनि प्रदूषण और डेसीबल
जब किसी स्थान पर ध्वनि का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है तो उसे ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है।
भारत में मानक ध्वनि स्तर (dB)
औद्योगिक क्षेत्रों में भारी मशीनों, कारखानों और उत्पादन इकाइयों के कारण ध्वनि का स्तर अपेक्षाकृत अधिक होता है। इसी कारण यहाँ दिन के समय अधिकतम 75 डेसीबल तथा रात के समय 70 डेसीबल तक ध्वनि स्तर को स्वीकार्य माना गया है। इन सीमाओं से अधिक शोर होने पर श्रमिकों और आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वाणिज्यिक क्षेत्रों जैसे बाजार, कार्यालय परिसर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गतिविधियाँ दिन में अधिक होती हैं। इसलिए यहाँ दिन के समय ध्वनि का मानक स्तर 65 डेसीबल निर्धारित किया गया है जबकि रात के समय इसे घटाकर 55 डेसीबल कर दिया जाता है। इससे रात्रि में लोगों को अपेक्षाकृत शांत वातावरण मिल सके।
आवासीय क्षेत्रों में लोगों का दैनिक जीवन, विश्राम और नींद निर्बाध रूप से चल सके इसके लिए ध्वनि स्तर और भी कम रखा गया है। इन क्षेत्रों में दिन के समय अधिकतम 55 डेसीबल तथा रात के समय 45 डेसीबल ध्वनि स्तर को सुरक्षित माना गया है। इससे बच्चों, बुज़ुर्गों और रोगियों के स्वास्थ्य की रक्षा होती है।
सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं शांत क्षेत्र, जिनमें अस्पताल, विद्यालय, न्यायालय और पुस्तकालय जैसे स्थान शामिल होते हैं। यहाँ शांति बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होता है। इसलिए इन क्षेत्रों में दिन के समय ध्वनि का स्तर 50 डेसीबल तथा रात के समय केवल 40 डेसीबल तक सीमित रखा गया है।
डेसीबल और संगीत
संगीत में डेसीबल का विशेष महत्व है:
- संगीत कार्यक्रमों में ध्वनि स्तर नियंत्रित करने के लिए
- रिकॉर्डिंग स्टूडियो में
- स्पीकर और हेडफोन की गुणवत्ता जाँचने में
अत्यधिक तेज़ संगीत (100 dB से अधिक) लंबे समय तक सुनने से श्रवण शक्ति में कमी हो सकती है।
डेसीबल मापने के यंत्र
ध्वनि स्तर मापने के लिए जिस यंत्र का प्रयोग किया जाता है उसे साउंड लेवल मीटर कहते हैं।
साउंड लेवल मीटर के उपयोग
- औद्योगिक क्षेत्रों में
- हवाई अड्डों पर
- पर्यावरण सर्वेक्षण में
- ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण में
डेसीबल का अन्य क्षेत्रों में उपयोग
हालाँकि डेसीबल का प्रयोग मुख्यतः ध्वनि के लिए होता है लेकिन इसका उपयोग:
- इलेक्ट्रॉनिक्स (सिग्नल शक्ति)
- दूरसंचार
- भूकंप की तीव्रता (रिक्टर पैमाना भी लघुगणकीय) जैसे क्षेत्रों में भी होता है।

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