नरसिंह वर्मन द्वितीय ने जिसकी उपाधि राजसिंह थी, कांची में किस मंदिर का निर्माण कराया?

नरसिंह वर्मन द्वितीय ने जिसकी उपाधि राजसिंह थी, कांची में किस मंदिर का निर्माण कराया?
नरसिंह वर्मन द्वितीय ने जिसकी उपाधि राजसिंह थी, कांची में कैलाश मंदिर का निर्माण कराया। दक्षिण भारत के इतिहास में पल्लव वंश का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है। इस वंश के शासकों ने न केवल राजनीतिक दृष्टि से दक्षिण भारत को संगठित किया बल्कि कला, स्थापत्य, धर्म और साहित्य के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया। इन्हीं महान शासकों में से एक थे नरसिंहवर्मन द्वितीय जिनकी उपाधि राजसिंह थी। उनके शासनकाल में कांची (कांचीपुरम) में निर्मित कैलाश मंदिर (कैलासनाथ मंदिर) भारतीय मंदिर वास्तुकला का एक अनमोल रत्न है। यह मंदिर पल्लव स्थापत्य की परिपक्वता, धार्मिक आस्था और शिल्प कौशल का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : पल्लव वंश और कांची पल्लव वंश का उदय दक्षिण भारत में लगभग तीसरी शताब्दी ईस्वी के आसपास हुआ। इस वंश की राजधानी कांची (वर्तमान कांचीपुरम, तमिलनाडु) थी। कांची प्राचीन काल से ही शिक्षा, धर्म और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। इसे “दक्षिण का वाराणसी” भी कहा जाता है। पल्लव शासकों में महेंद्रवर्मन प्रथम और नरसिंहवर्मन प्रथम विशेष रूप से प्रसिद्ध हुए। महेंद्रवर्मन प्रथम ने गुफा-शैली क…

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