चेचक के टीके की खोज किसने की थी?

Sanjay Yadav
चेचक (smallpox) के टीके की खोज एडवर्ड जेनर ने की थी। मानव इतिहास में कुछ खोजें ऐसी हुई हैं जिन्होंने न केवल विज्ञान की दिशा बदल दी बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को भी बचाया। चेचक (Smallpox) ऐसी ही एक घातक बीमारी थी जिसने सदियों तक मानव समाज को भयभीत किया। यह रोग इतना संक्रामक और घातक था कि कई सभ्यताओं की जनसंख्या पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा। बच्चों से लेकर वयस्कों तक, कोई भी इससे सुरक्षित नहीं था। चेहरे पर स्थायी दाग, अंधत्व और मृत्यु ये सब चेचक के सामान्य परिणाम थे।

इसी विनाशकारी बीमारी के विरुद्ध पहली प्रभावी ढाल प्रदान की Edward Jenner ने। एडवर्ड जेनर द्वारा 1796 में चेचक के टीके की खोज मानव इतिहास की एक क्रांतिकारी उपलब्धि मानी जाती है। उनकी खोज ने न केवल चेचक को नियंत्रित किया बल्कि आधुनिक प्रतिरक्षण विज्ञान (Immunology) की नींव भी रखी।

चेचक के टीके की खोज एडवर्ड जेनर ने की थी।

इस पोस्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि चेचक क्या था, इसकी भयावहता कैसी थी, एडवर्ड जेनर का जीवन परिचय, उनकी खोज की प्रक्रिया, टीकाकरण का सिद्धांत, इस खोज का वैश्विक प्रभाव, और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इसका महत्व क्या है।

चेचक रोग का परिचय

चेचक एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग था जिसका कारण वेरियोला (Variola) नामक वायरस था। यह रोग मुख्यतः श्वसन तंत्र के माध्यम से फैलता था। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, उसके द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं से या हवा के माध्यम से भी यह संक्रमण फैल सकता था।

चेचक के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी, और पूरे शरीर पर लाल दाने शामिल थे। ये दाने बाद में फफोलों में बदल जाते थे और उनमें मवाद भर जाता था। कुछ दिनों बाद ये सूखकर पपड़ी बन जाते थे लेकिन उनके स्थान पर स्थायी गहरे दाग रह जाते थे।

चेचक की मृत्यु दर अत्यधिक थी। कई बार संक्रमित व्यक्तियों में से 20 से 30 प्रतिशत तक लोगों की मृत्यु हो जाती थी। बच्चों में यह दर और भी अधिक होती थी। जो लोग जीवित बचते थे उनमें अक्सर अंधापन या विकलांगता देखी जाती थी।

इतिहास में चेचक का प्रभाव

चेचक का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। प्राचीन मिस्र की ममी में भी चेचक के निशान पाए गए हैं। चीन और भारत में भी इस रोग के प्राचीन प्रमाण मिलते हैं।

मध्यकालीन यूरोप में चेचक ने कई बार महामारी का रूप लिया। राजपरिवार तक इससे अछूते नहीं रहे। कई शासकों और राजकुमारों की मृत्यु चेचक के कारण हुई।

जब यूरोपीय लोग अमेरिका पहुंचे तो वे अपने साथ चेचक का वायरस भी ले गए। स्थानीय मूल निवासियों में इस रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता नहीं थी जिससे बड़ी संख्या में उनकी मृत्यु हुई। यह इतिहास का एक दुखद अध्याय है।

एडवर्ड जेनर का जीवन परिचय

Edward Jenner
Edward Jenner

Edward Jenner का जन्म 17 मई 1749 को इंग्लैंड के ग्लॉस्टरशायर के बर्कले नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता एक पादरी थे। बचपन से ही जेनर की रुचि विज्ञान और प्रकृति में थी।

उन्होंने चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त की और लंदन में प्रसिद्ध सर्जन जॉन हंटर के अधीन प्रशिक्षण लिया। जेनर ने ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा अभ्यास शुरू किया जहां उन्होंने कई वर्षों तक लोगों का उपचार किया।

जेनर का स्वभाव जिज्ञासु था। वे प्रकृति के रहस्यों को समझने में रुचि रखते थे। इसी जिज्ञासा ने उन्हें चेचक के टीके की खोज की ओर प्रेरित किया। उन्हें "प्रतिरक्षा विज्ञान का जनक" भी कहा जाता है।

चेचक से बचाव के प्रारंभिक प्रयास: वेरियोलेशन

जेनर से पहले भी चेचक से बचाव के प्रयास किए गए थे। एक विधि थी जिसे "वेरियोलेशन" कहा जाता था। इसमें चेचक के रोगी के फफोलों से मवाद लेकर स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित किया जाता था।

इस प्रक्रिया से व्यक्ति में हल्का संक्रमण होता था जिससे वह भविष्य में गंभीर चेचक से बच सकता था। लेकिन यह विधि जोखिमपूर्ण थी। कई बार व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाता था या उसकी मृत्यु भी हो जाती थी। इसलिए एक सुरक्षित और प्रभावी उपाय की आवश्यकता थी।

गाय चेचक (Cowpox) का अवलोकन

ग्रामीण क्षेत्रों में एक मान्यता थी कि जो दुग्ध दुहने वाली महिलाएँ गाय चेचक (Cowpox) से संक्रमित हो जाती हैं उन्हें बाद में चेचक नहीं होता।

गाय चेचक एक हल्का रोग था जो गायों से मनुष्यों में फैलता था। इसके लक्षण हल्के होते थे और यह जानलेवा नहीं था।

एडवर्ड जेनर ने इस लोकविश्वास पर ध्यान दिया। उन्होंने सोचा कि यदि गाय चेचक से संक्रमित व्यक्ति चेचक से सुरक्षित रहता है तो संभवतः गाय चेचक का संक्रमण शरीर में ऐसी प्रतिरक्षा उत्पन्न करता है जो चेचक से रक्षा करती है।

ऐतिहासिक प्रयोग: 1796

14 मई 1796 को जेनर ने अपना ऐतिहासिक प्रयोग किया। उन्होंने सारा नेल्म्स नामक एक दुग्ध दुहने वाली महिला के हाथ पर गाय चेचक के फफोले से मवाद लिया।

फिर उन्होंने यह मवाद 8 वर्षीय बालक जेम्स फिप्स के शरीर में प्रविष्ट कराया। कुछ दिनों तक बालक को हल्का बुखार रहा लेकिन वह शीघ्र स्वस्थ हो गया।

कुछ सप्ताह बाद जेनर ने जेम्स फिप्स को चेचक के वायरस के संपर्क में लाया। आश्चर्यजनक रूप से उसे चेचक नहीं हुआ।

यह मानव इतिहास का पहला सफल टीकाकरण था।

“वैक्सीन” शब्द की उत्पत्ति

गाय को लैटिन भाषा में “Vacca” कहा जाता है। इसी शब्द से “Vaccination” शब्द बना।

जेनर की खोज के बाद इस प्रक्रिया को “वैक्सीनेशन” कहा जाने लगा। धीरे-धीरे यह शब्द सभी प्रकार के टीकाकरण के लिए प्रयुक्त होने लगा।

वैज्ञानिक सिद्धांत: प्रतिरक्षा तंत्र की भूमिका

जेनर की खोज ने यह सिद्ध किया कि शरीर में एक प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) होता है। जब शरीर किसी कमजोर या संबंधित वायरस के संपर्क में आता है तो वह उसके विरुद्ध एंटीबॉडी बनाता है।

यदि भविष्य में वही या उससे संबंधित खतरनाक वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा तंत्र उसे पहचानकर नष्ट कर देता है।

यह सिद्धांत आधुनिक इम्यूनोलॉजी की आधारशिला बना।

प्रारंभिक विरोध और स्वीकृति

जेनर की खोज को प्रारंभ में संदेह की दृष्टि से देखा गया। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। धार्मिक और सामाजिक कारणों से भी टीकाकरण को लेकर भ्रम था।

लेकिन धीरे-धीरे परिणाम सामने आने लगे। जिन लोगों को टीका लगाया गया, वे चेचक से सुरक्षित रहे। इससे जेनर की खोज को मान्यता मिली।

विश्व में टीकाकरण का प्रसार

जेनर की खोज के बाद यूरोप और अमेरिका में टीकाकरण अभियान शुरू हुए। कई देशों ने इसे अनिवार्य किया।

19वीं और 20वीं शताब्दी में बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रम चलाए गए। इससे चेचक के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और चेचक उन्मूलन

World Health Organization ने 1967 में चेचक उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया। व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया। अंततः 1980 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की कि चेचक का वैश्विक उन्मूलन हो चुका है। यह मानव इतिहास की पहली और अब तक की सबसे बड़ी सफल रोग-उन्मूलन उपलब्धि थी।

मानवता पर प्रभाव

एडवर्ड जेनर की खोज ने करोड़ों लोगों का जीवन बचाया। चेचक जैसी घातक बीमारी का पूरी तरह समाप्त होना विज्ञान की महान उपलब्धि है। टीकाकरण के सिद्धांत पर आधारित अन्य टीके भी विकसित किए गए जैसे पोलियो, खसरा, टेटनस आदि। आज टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य का आधार बन चुका है।

इस प्रश्न का महत्व

“चेचक के टीके की खोज किसने की थी?” यह प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान (GK) की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका सही उत्तर है Edward Jenner। एडवर्ड जेनर एक अंग्रेज चिकित्सक थे। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग, राज्य लोक सेवा आयोग तथा विभिन्न शिक्षण भर्ती परीक्षाओं में यह प्रश्न कई बार सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पूछा गया है। कभी प्रश्न खोजकर्ता के नाम से पूछा जाता है, कभी वर्ष से, तो कभी “वैक्सीनेशन” शब्द की उत्पत्ति से संबंधित पूछा जाता है। “Vaccination” शब्द लैटिन भाषा के शब्द “Vacca” (जिसका अर्थ गाय है) से बना है। यह तथ्य भी अक्सर सामान्य विज्ञान और इतिहास के अंतर्गत पूछा जाता है।

चेचक विश्व की पहली ऐसी बीमारी है जिसका पूर्ण उन्मूलन हुआ। World Health Organization ने 1980 में आधिकारिक रूप से चेचक उन्मूलन की घोषणा की। इसलिए यह विषय अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैश्विक स्वास्थ्य अभियानों से संबंधित प्रश्नों के लिए भी महत्वपूर्ण है। कई परीक्षाओं में कथन-कारण (Assertion-Reason), मिलान कीजिए (Match the Following) और बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) के रूप में इससे जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

यदि आप अपने GK या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो ऐसे महत्वपूर्ण तथ्यों को अवश्य याद रखें। ज्ञानवर्धक प्लेटफॉर्म “Happy New Year” पर सकारात्मक के साथ जब इस प्रकार की उपयोगी जानकारी प्रस्तुत की जाती है तो यह संदेश जाता है कि हर दिन कुछ नया सीखना ही असली Happy New Year है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में ऐसे ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्यों का विशेष महत्व होता है क्योंकि ये बार-बार पूछे जाने वाले और आधारभूत ज्ञान से जुड़े प्रश्न होते हैं।

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