कॉर्पोरेट मित्र योजना पर फोकस: IICA शिलांग ने जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किया वेबिनार

Sanjay Yadav
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इन उद्यमों को व्यवसाय संचालन, कानूनी अनुपालन (Compliance) और कॉर्पोरेट प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, विशेषकर छोटे शहरों और दूरदराज़ के क्षेत्रों में जहाँ पेशेवर सलाहकार सेवाओं की उपलब्धता सीमित है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (IICA), शिलांग ने 'कॉर्पोरेट मित्र योजना' के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक वेबिनार आयोजित किया। इस वेबिनार का उद्देश्य युवाओं, पेशेवरों और MSME क्षेत्र से जुड़े लोगों को इस नई पहल की जानकारी देना और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ना था।

कॉर्पोरेट मित्र योजना पर फोकस IICA शिलांग ने जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित किया वेबिनार

क्या है कॉर्पोरेट मित्र योजना?

कॉर्पोरेट मित्र योजना भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs - MCA) की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का संचालन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (Indian Institute of Corporate Affairs - IICA) द्वारा किया जा रहा है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित और मान्यता प्राप्त 'कॉर्पोरेट मित्र' (Corporate Mitras) तैयार करना है, जो पैरा-प्रोफेशनल (Para-professionals) के रूप में कार्य करते हुए MSME इकाइयों को कम लागत पर व्यवसायिक मार्गदर्शन और कानूनी अनुपालन (Compliance) से संबंधित सेवाएँ उपलब्ध करा सकें।

योजना का उद्देश्य

कॉर्पोरेट मित्र योजना का लक्ष्य देश में MSME क्षेत्र को अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके तहत प्रशिक्षित कॉर्पोरेट मित्र छोटे और मध्यम उद्योगों को कंपनी कानून, व्यवसाय पंजीकरण, नियामकीय अनुपालन, दस्तावेज़ीकरण तथा अन्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करेंगे।

यह पहल विशेष रूप से उन उद्यमियों के लिए लाभकारी होगी जो महंगी प्रोफेशनल कंसल्टिंग सेवाएँ लेने में सक्षम नहीं हैं। प्रशिक्षित कॉर्पोरेट मित्र स्थानीय स्तर पर कम लागत में गुणवत्तापूर्ण परामर्श उपलब्ध कराएंगे, जिससे व्यवसाय संचालन अधिक सरल और पारदर्शी बन सकेगा।

टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष ध्यान

इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों पर रखा गया है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में MSME संचालित होते हैं, लेकिन पेशेवर सलाहकारों और कॉर्पोरेट विशेषज्ञों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम होती है।

कॉर्पोरेट मित्र योजना के माध्यम से इन शहरों में प्रशिक्षित पैरा-प्रोफेशनल्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो स्थानीय उद्यमियों को उनके व्यवसाय से जुड़ी आवश्यक जानकारी, कानूनी सलाह और अनुपालन संबंधी सहायता प्रदान करेंगे। इससे छोटे शहरों के उद्योगों को भी बड़े शहरों जैसी पेशेवर सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

प्रशिक्षण और प्रतिभागियों का लक्ष्य

इस योजना के अंतर्गत देशभर से 2,000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें कॉर्पोरेट कानून, व्यवसायिक अनुपालन, MSME प्रबंधन तथा अन्य व्यावसायिक विषयों की जानकारी दी जाएगी ताकि वे प्रमाणित कॉर्पोरेट मित्र के रूप में कार्य कर सकें।

योजना के पहले चरण में पूर्वोत्तर (North-East) क्षेत्र के 200 उम्मीदवारों को शामिल किया जाएगा। इस क्षेत्र में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इन उम्मीदवारों को कोर्स शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जाएगी। यह कदम पूर्वोत्तर भारत में उद्यमिता और व्यवसायिक सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

MSME क्षेत्र के लिए योजना का महत्व

भारत का MSME क्षेत्र रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। फिर भी अनेक छोटे उद्यम कानूनी नियमों, कंपनी पंजीकरण, नियामकीय अनुपालन और दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं की जानकारी के अभाव में कठिनाइयों का सामना करते हैं।

कॉर्पोरेट मित्र योजना इन चुनौतियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे MSME इकाइयों को समय पर सही मार्गदर्शन मिलेगा, अनुपालन संबंधी त्रुटियाँ कम होंगी, व्यवसाय संचालन आसान होगा और उद्यमियों का विश्वास भी बढ़ेगा। साथ ही, यह योजना युवाओं और पेशेवरों के लिए नए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेगी।

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