स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में 23वें राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games - CWG) का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित होने के साथ ही इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ हुआ। राष्ट्रमंडल खेल विश्व के सबसे महत्वपूर्ण बहु-खेल आयोजनों में से एक हैं जहाँ विभिन्न राष्ट्रमंडल देशों और क्षेत्रों के हजारों खिलाड़ी अनेक खेल प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है बल्कि विभिन्न देशों के बीच मित्रता, सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल भावना को भी मजबूत करता है।
राष्ट्रमंडल खेलों का इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है। इन खेलों का पहला आयोजन वर्ष 1930 में कनाडा के हैमिल्टन नगर में ब्रिटिश एम्पायर गेम्स (British Empire Games) के नाम से किया गया था। उस समय इन खेलों का उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले देशों के खिलाड़ियों को एक साझा मंच प्रदान करना था, जहाँ वे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से खेल कौशल का प्रदर्शन कर सकें। समय के साथ विश्व की राजनीतिक परिस्थितियों में परिवर्तन हुआ, अनेक देश स्वतंत्र हुए और इन खेलों का स्वरूप भी बदलता गया। बाद में इसका नाम बदलकर राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) कर दिया गया।
राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन ओलंपिक खेलों की तर्ज पर किया जाता है। यह एक बहु-खेल (Multi-Sport) अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है जिसमें एथलेटिक्स, तैराकी, कुश्ती, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, हॉकी, भारोत्तोलन, शूटिंग, जिम्नास्टिक, साइक्लिंग, टेबल टेनिस सहित अनेक खेलों की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। इन खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी अपने देश के लिए पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान अर्जित करते हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन राष्ट्रमंडल (Commonwealth of Nations) के अंतर्गत आने वाले देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ियों के लिए किया जाता है। राष्ट्रमंडल स्वयं 56 संप्रभु देशों का एक स्वैच्छिक संगठन है। इन देशों में अधिकांश वे राष्ट्र हैं जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य के उपनिवेश रहे थे। स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भी इन देशों ने आपसी सहयोग, लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक विकास, शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रमंडल संगठन की सदस्यता बनाए रखी।
राष्ट्रमंडल संगठन की सदस्यता स्थायी नहीं होती। समय-समय पर वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों, संवैधानिक परिवर्तनों तथा सदस्य देशों के स्वैच्छिक प्रवेश (Admission) अथवा निष्क्रमण (Withdrawal) के कारण इसकी सदस्यता में परिवर्तन होता रहता है। यही कारण है कि विभिन्न समयों में सदस्य देशों की संख्या बदलती रही है। वर्तमान में राष्ट्रमंडल संगठन में 56 सदस्य देश हैं जबकि राष्ट्रमंडल खेलों में 71 देशों एवं क्षेत्रों के खिलाड़ी भाग लेते हैं। इसका कारण यह है कि कुछ आश्रित प्रदेश और स्वायत्त क्षेत्र भी अलग-अलग दलों के रूप में इन खेलों में भाग लेने के पात्र होते हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों का वैश्विक महत्व अत्यंत व्यापक है। यह आयोजन विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बहु-खेल आयोजन माना जाता है। केवल ओलंपिक खेल ही इससे बड़े बहु-खेल आयोजन हैं। इसके अतिरिक्त यह विश्व का चौथा सर्वाधिक देखा जाने वाला वैश्विक खेल प्रसारण आयोजन भी है। करोड़ों दर्शक टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों से इन खेलों का सीधा प्रसारण देखते हैं। इससे खेलों की लोकप्रियता बढ़ती है तथा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त होती है।
भारत का राष्ट्रमंडल खेलों से विशेष संबंध रहा है। भारतीय खिलाड़ियों ने कुश्ती, बैडमिंटन, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, शूटिंग, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसे खेलों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए अनेक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते हैं। भारत राष्ट्रमंडल खेलों के सबसे सफल देशों में गिना जाता है और लगातार शीर्ष पदक तालिका में स्थान प्राप्त करता रहा है।
भारत ने पहली बार वर्ष 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों की सफल मेज़बानी की थी। यह भारत के खेल इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय था। इन खेलों के आयोजन के लिए विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित की गई, अनेक स्टेडियमों का निर्माण एवं आधुनिकीकरण किया गया तथा देश की आयोजन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। इस आयोजन ने भारत की वैश्विक छवि को मजबूत किया तथा खेल संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारत के लिए एक और ऐतिहासिक अवसर वर्ष 2030 में आने वाला है। राष्ट्रमंडल खेल पुनः भारत में आयोजित किए जाएंगे जब अहमदाबाद (गुजरात) इन खेलों की मेज़बानी करेगा। यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम राष्ट्रमंडल खेलों के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इसे शताब्दी राष्ट्रमंडल खेल (Centenary Commonwealth Games) के रूप में आयोजित किया जाएगा। यह भारत के लिए वैश्विक खेल आयोजनों की मेज़बानी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि होगी और देश के खेल बुनियादी ढाँचे, पर्यटन, अर्थव्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगी।
राष्ट्रमंडल खेल केवल पदक जीतने का मंच नहीं हैं बल्कि यह विभिन्न देशों के बीच मित्रता, शांति, समानता और सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। इन खेलों के माध्यम से युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलता है तथा विभिन्न देशों की संस्कृतियों के बीच आपसी समझ और सम्मान बढ़ता है। यही कारण है कि राष्ट्रमंडल खेल आज विश्व खेल जगत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली आयोजनों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से राष्ट्रमंडल खेल अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। परीक्षाओं में इसके प्रथम आयोजन (1930, हैमिल्टन), प्रथम नाम (ब्रिटिश एम्पायर गेम्स), राष्ट्रमंडल के 56 सदस्य देश, खेलों में भाग लेने वाले 71 देश एवं क्षेत्र, भारत द्वारा 2010 में नई दिल्ली में पहली मेज़बानी तथा 2030 में अहमदाबाद में आयोजित होने वाले शताब्दी राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
