किर्गिज़स्तान में SCO बैठक: भारत ने आतंकवाद पर दुनिया को दिया स्पष्ट संदेश

Sanjay Yadav
भारत ने किर्गिज़ गणराज्य के चोलपोन-अता (Cholpon-Ata) में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation - SCO) के विदेश मंत्रियों की परिषद (Council of Foreign Ministers) की बैठक में आतंकवाद के विरुद्ध दृढ़, सिद्धांत-आधारित और बिना किसी दोहरे मानदंड वाले दृष्टिकोण को अपनाने का आग्रह किया। भारत ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी सदस्य देशों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। यह बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, संपर्क (Connectivity) और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

किर्गिज़स्तान में SCO बैठक भारत ने आतंकवाद पर दुनिया को दिया स्पष्ट संदेश

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) आज विश्व के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठनों में से एक है। इसकी स्थापना का उद्देश्य केवल आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना नहीं था बल्कि मध्य एशिया क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना भी था। वर्तमान समय में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए यह संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

शंघाई पाँच (Shanghai Five) से SCO तक का सफर

SCO की शुरुआत वर्ष 1996 में शंघाई पाँच (Shanghai Five) के रूप में हुई थी। इसका गठन पूर्व सोवियत संघ के चार गणराज्यों तथा चीन के बीच सीमा-निर्धारण (Border Demarcation) और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य बलों की संख्या कम करने से संबंधित वार्ताओं के परिणामस्वरूप हुआ था। उस समय इसका प्रमुख उद्देश्य सीमाई विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, आपसी विश्वास बढ़ाना तथा क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करना था।

शंघाई पाँच के प्रारंभिक सदस्य निम्नलिखित थे—
  • कज़ाख़स्तान (Kazakhstan)
  • चीन (China)
  • किर्गिज़स्तान (Kyrgyzstan)
  • रूस (Russia)
  • ताजिकिस्तान (Tajikistan)
इन पाँच देशों के सहयोग से मध्य एशिया में सुरक्षा संबंधी विश्वास बढ़ा और क्षेत्रीय सहयोग की मजबूत नींव रखी गई।

वर्ष 2001 में बना शंघाई सहयोग संगठन (SCO)

वर्ष 2001 में उज़्बेकिस्तान (Uzbekistan) के इस समूह में शामिल होने के बाद शंघाई पाँच का विस्तार हुआ और इसका नाम बदलकर शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation - SCO) रखा गया। इसके साथ ही संगठन का कार्यक्षेत्र केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित न रहकर आतंकवाद विरोध, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, परिवहन, व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा क्षेत्रीय विकास तक विस्तृत हो गया।

SCO का प्रमुख उद्देश्य

शंघाई सहयोग संगठन का मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया क्षेत्र में आतंकवाद, अलगाववाद (Separatism) तथा उग्रवाद (Extremism) पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाना है। इसके अतिरिक्त संगठन निम्नलिखित उद्देश्यों पर भी कार्य करता है—
  • क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देना।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा-पार आतंकवाद पर नियंत्रण।
  • आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग को मजबूत करना।
  • ऊर्जा, परिवहन और संपर्क परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना।
  • विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना।
  • बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना।

SCO के वर्तमान सदस्य देश

वर्तमान में SCO के 10 पूर्ण सदस्य देश हैं—
  • चीन (China)
  • रूस (Russia)
  • भारत (India)
  • पाकिस्तान (Pakistan)
  • ईरान (Iran)
  • बेलारूस (Belarus)
  • कज़ाख़स्तान (Kazakhstan)
  • किर्गिज़स्तान (Kyrgyzstan)
  • ताजिकिस्तान (Tajikistan)
  • उज़्बेकिस्तान (Uzbekistan)
इन देशों का भौगोलिक विस्तार यूरोप से लेकर दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया तक फैला हुआ है जिससे यह संगठन रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

भारत और SCO

भारत को वर्ष 2017 में SCO की पूर्ण सदस्यता प्राप्त हुई। इससे पहले भारत कई वर्षों तक पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में संगठन की गतिविधियों में भाग लेता रहा था। पूर्ण सदस्य बनने के बाद भारत ने आतंकवाद विरोध, क्षेत्रीय संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है।

वर्ष 2023 में भारत ने SCO की घूर्णन अध्यक्षता (Rotational Presidency) का दायित्व संभाला। इस दौरान भारत ने "SECURE" (Security, Economic Development, Connectivity, Unity, Respect for Sovereignty and Environment) की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास किया। भारत ने डिजिटल सहयोग, स्टार्टअप, नवाचार, पारंपरिक चिकित्सा, युवा आदान-प्रदान तथा बहुपक्षीय संवाद को भी प्रोत्साहित किया।

SCO का वैश्विक महत्व

शंघाई सहयोग संगठन केवल क्षेत्रीय मंच नहीं रह गया है बल्कि यह विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

इसके सदस्य देश—
  • विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • विश्व की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या इन देशों में निवास करती है।
  • ऊर्जा संसाधनों, प्राकृतिक गैस, तेल और खनिज संपदा के दृष्टिकोण से भी यह संगठन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसी कारण SCO को विश्व की सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय क्षेत्रीय संस्थाओं में शामिल किया जाता है।

पर्यवेक्षक देश

SCO में कुछ देश पर्यवेक्षक (Observer States) के रूप में भी जुड़े हुए हैं। वर्तमान में प्रमुख पर्यवेक्षक देश हैं—
  • अफगानिस्तान (Afghanistan)
  • मंगोलिया (Mongolia)
ये देश संगठन की बैठकों में भाग लेते हैं लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में मतदान का अधिकार नहीं रखते।

आधिकारिक भाषाएँ

शंघाई सहयोग संगठन की दो आधिकारिक भाषाएँ हैं:
रूसी (Russian)
चीनी (Chinese)
संगठन के अधिकांश आधिकारिक दस्तावेज, बैठकें और संचार इन्हीं भाषाओं में संचालित किए जाते हैं।

SCO की संगठनात्मक संरचना

SCO की निर्णय-निर्माण प्रणाली सुव्यवस्थित और बहुस्तरीय है।

1. राष्ट्राध्यक्ष परिषद (Council of Heads of State - CHS)
  • यह संगठन का सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय है। इसकी बैठक प्रतिवर्ष आयोजित होती है, जिसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भाग लेते हैं। संगठन की प्रमुख नीतियाँ, विस्तार, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय इसी परिषद द्वारा लिए जाते हैं।
2. विदेश मंत्रियों की परिषद (Council of Foreign Ministers)
  • यह परिषद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, सुरक्षा सहयोग, कूटनीतिक संबंधों तथा आगामी शिखर सम्मेलनों की तैयारियों पर विचार करती है।

SCO के दो स्थायी निकाय

संगठन के दो प्रमुख स्थायी संस्थान हैं—
1. सचिवालय (Secretariat)

मुख्यालय: बीजिंग (चीन)
कार्य: संगठन की प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन, बैठकों का समन्वय, कार्यक्रमों का क्रियान्वयन तथा सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करना।

2. क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (Regional Anti-Terrorist Structure - RATS)

मुख्यालय: ताशकंद (उज़्बेकिस्तान)
कार्य: आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान, संयुक्त रणनीति तैयार करना, खुफिया सहयोग बढ़ाना तथा सदस्य देशों के बीच आतंकवाद-रोधी अभियानों में समन्वय स्थापित करना।

RATS को SCO की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा संस्था माना जाता है और यह सीमा-पार आतंकवाद से निपटने में सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भारत का आतंकवाद के विरुद्ध संदेश

किर्गिज़ गणराज्य में आयोजित विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में भारत ने दोहराया कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। भारत ने सभी सदस्य देशों से आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाने, सीमा-पार आतंकवाद को समाप्त करने, आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता रोकने तथा संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी प्रस्तावों का पूर्ण पालन करने का आग्रह किया। भारत ने यह भी कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार का चयनात्मक दृष्टिकोण वैश्विक शांति के लिए हानिकारक है।

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