भारत सरकार शिक्षा को सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन करती है। इन्हीं महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री-यशस्वी (PM-YASASVI : प्रधानमंत्री यंग अचीवर्स छात्रवृत्ति पुरस्कार योजना फॉर वाइब्रेंट इंडिया)। हाल ही में भारत सरकार ने इस योजना के अंतर्गत शैक्षिक अवसरों के विस्तार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के मेधावी विद्यार्थी केवल आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपनी शिक्षा बीच में न छोड़ें बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर मिले।
प्रधानमंत्री-यशस्वी (PM-YASASVI) योजना विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EBC) तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT) के विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है। इन वर्गों के अनेक विद्यार्थी सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते हैं। इस योजना के माध्यम से सरकार उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान कर उनकी शैक्षिक यात्रा को आसान बनाने का प्रयास करती है। इससे सामाजिक न्याय के साथ-साथ शिक्षा में समान अवसरों की अवधारणा को भी मजबूती मिलती है।
इस योजना का संचालन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है। मंत्रालय इस योजना के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास को बढ़ावा देता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि समाज के कमजोर वर्गों के विद्यार्थी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। उल्लेखनीय है कि इस योजना का 100 प्रतिशत वित्तपोषण सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसका अर्थ है कि योजना के लिए आवश्यक समस्त वित्तीय संसाधन केंद्र सरकार उपलब्ध कराती है जिससे राज्यों एवं लाभार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
प्रधानमंत्री-यशस्वी योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विद्यार्थियों की विभिन्न शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चार प्रमुख छात्रवृत्ति घटकों को शामिल किया गया है। पहला घटक पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना है, दूसरा उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना, तीसरा विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा योजना तथा चौथा महाविद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा योजना। इन चारों घटकों के माध्यम से विद्यालय स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक विद्यार्थियों को निरंतर सहायता प्रदान की जाती है।
पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना विशेष रूप से सरकारी विद्यालयों में कक्षा 9 एवं 10 में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है। इस योजना के अंतर्गत ऐसे परिवारों के विद्यार्थियों को लाभ मिलता है जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। पात्र विद्यार्थियों को 4,000 रुपये प्रतिवर्ष की शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता पुस्तकों, अध्ययन सामग्री, विद्यालय संबंधी आवश्यकताओं तथा अन्य शैक्षिक खर्चों को पूरा करने में सहायक होती है। इस प्रकार यह योजना प्रारंभिक स्तर पर ही विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करती है।
उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद आगे की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न पाठ्यक्रमों की श्रेणी के अनुसार विद्यार्थियों को 5,000 रुपये से 20,000 रुपये तक की शैक्षणिक सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता विद्यार्थियों की शिक्षा, अध्ययन सामग्री, शुल्क तथा अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी सिद्ध होती है। उच्च शिक्षा के दौरान आर्थिक सहायता मिलने से विद्यार्थी अपने अध्ययन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा योजना तथा महाविद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षा योजना का उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध कराना है। इन योजनाओं के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को ऐसे संस्थानों में अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जहाँ उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ तथा प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्राप्त हो सके।
प्रधानमंत्री-यशस्वी योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक कठिनाइयों के बिना विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। अनेक बार आर्थिक अभाव के कारण प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ देते हैं या उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। यह योजना ऐसे विद्यार्थियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है ताकि वे बिना किसी वित्तीय चिंता के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और भविष्य में देश के विकास में योगदान दे सकें।
यह योजना केवल छात्रवृत्ति प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता, समावेशी शिक्षा और मानव संसाधन विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे समाज के कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलते हैं, शिक्षा का स्तर बढ़ता है तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योग्य और शिक्षित युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
