महाराष्ट्र सरकार ने जैव विविधता संरक्षण और आधुनिक तकनीक के समन्वय की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य में लगभग ₹45 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक इको-नेचर पार्क विकसित करने को स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहाँ भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) आधारित पक्षियों की पहचान एवं निगरानी केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह पहल न केवल वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देगी बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा तथा इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देगी।
इस परियोजना के अंतर्गत अभयारण्य में AI-आधारित निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी जिसमें अत्याधुनिक कैमरे, सेंसर तथा बुद्धिमान निगरानी उपकरणों का उपयोग होगा। इन प्रणालियों की सहायता से विभिन्न पक्षी प्रजातियों की स्वतः पहचान की जाएगी, उनके प्रवासन (Migration) के पैटर्न का अध्ययन किया जाएगा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये महत्त्वपूर्ण आँकड़े एकत्र किए जाएंगे। यह तकनीक स्वचालित छवि (Image Recognition) और ध्वनि (Sound Recognition) विश्लेषण के माध्यम से लगभग 1.5 किलोमीटर क्षेत्र में पक्षियों की गतिविधियों की निगरानी करेगी। इससे संरक्षण कार्यों में सटीकता बढ़ेगी और मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता कम होगी।
ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और नवी मुंबई के मध्य स्थित ठाणे क्रीक के तट पर अवस्थित है। वर्ष 2015 में इसे आधिकारिक रूप से वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था। यह भारत का पहला ऐसा अभयारण्य है जिसे विशेष रूप से फ्लेमिंगो पक्षियों के संरक्षण के लिये समर्पित किया गया है। यह क्षेत्र देश की सबसे महत्त्वपूर्ण तटीय आर्द्रभूमियों (Coastal Wetlands) में से एक माना जाता है और पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील एवं समृद्ध है।
यह अभयारण्य हज़ारों फ्लेमिंगो पक्षियों के अतिरिक्त 200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। यहाँ बड़े फ्लेमिंगो (Greater Flamingo), छोटे फ्लेमिंगो (Lesser Flamingo), बगुले (Herons), एग्रेट (Egrets), विभिन्न तटीय पक्षी (Shorebirds) तथा किंगफिशर जैसी अनेक प्रजातियाँ नियमित रूप से देखी जाती हैं। विविध पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता तथा स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है।
ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य का एक अन्य महत्त्वपूर्ण पक्ष इसका अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षी मार्गों से जुड़ा होना है। यह अभयारण्य मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway) का हिस्सा है, जो यूरोप, मध्य एशिया तथा भारतीय उपमहाद्वीप को जोड़ने वाला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी मार्ग है। प्रत्येक वर्ष हजारों प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा कर इस क्षेत्र में भोजन, विश्राम तथा प्रजनन के लिये पहुँचते हैं। इस कारण यह अभयारण्य वैश्विक पक्षी संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
फ्लेमिंगो से संबंधित मुख्य तथ्य
फ्लेमिंगो लंबे एवं आकर्षक जल पक्षी होते हैं जिन्हें उनकी लंबी S-आकार की गर्दन, लंबी पतली टाँगों तथा विशिष्ट घुमावदार चोंच के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है। उनकी सुंदर आकृति और बड़े झुंडों में रहने की प्रवृत्ति उन्हें विश्व के सबसे आकर्षक पक्षियों में शामिल करती है।
फ्लेमिंगो अत्यधिक सामाजिक पक्षी होते हैं। ये प्रायः हजारों की संख्या में बड़े समूहों में निवास करते हैं और उथले जल निकायों में भोजन खोजते हैं। इन्हें विशेष रूप से खारे लैगून (Salt Lagoons), लवणीय मैदान (Salt Pans), क्षारीय झीलों (Alkaline Lakes) तथा पोषक तत्त्वों से समृद्ध आर्द्रभूमियों में देखा जाता है। समूह में रहने से इन्हें सुरक्षा मिलती है तथा प्रजनन की सफलता भी बढ़ती है।
विश्वभर में फ्लेमिंगो की कुल छह प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो मुख्यतः उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में वितरित हैं। भारत में इनमें से केवल दो प्रजातियाँ पाई जाती हैं—बड़ा फ्लेमिंगो (Greater Flamingo) तथा छोटा फ्लेमिंगो (Lesser Flamingo)। दोनों प्रजातियाँ विशेष रूप से गुजरात, महाराष्ट्र तथा अन्य तटीय क्षेत्रों की आर्द्रभूमियों में बड़ी संख्या में देखी जाती हैं।
विश्व की अन्य प्रमुख फ्लेमिंगो प्रजातियों में चिली फ्लेमिंगो (Phoenicopterus chilensis), अमेरिकी अथवा कैरेबियाई फ्लेमिंगो (Phoenicopterus ruber), एंडियन फ्लेमिंगो (Phoenicoparrus andinus) तथा जेम्स अथवा पुना फ्लेमिंगो (Phoenicoparrus jamesi) शामिल हैं। इनका वितरण मुख्यतः दक्षिण अमेरिका तथा कैरेबियाई क्षेत्रों में है।
फ्लेमिंगो के भोजन में मुख्यतः शैवाल (Algae), मोलस्क (Molluscs), छोटे क्रस्टेशियन (Crustaceans) तथा अन्य सूक्ष्म जलीय जीव शामिल होते हैं। इनके भोजन में उपस्थित कैरोटीनॉइड (Carotenoid) वर्णक इनके पंखों को गुलाबी, नारंगी अथवा हल्का लाल रंग प्रदान करते हैं। यदि इनके भोजन में कैरोटीनॉइड की मात्रा कम हो जाए तो इनके पंखों का रंग धीरे-धीरे फीका पड़ सकता है।
फ्लेमिंगो भोजन तथा प्रजनन के लिये उथली आर्द्रभूमियों, कीचड़युक्त तटीय क्षेत्रों, लैगून तथा नमकीन झीलों पर निर्भर रहते हैं। वर्तमान समय में इन पक्षियों के समक्ष अनेक गंभीर चुनौतियाँ हैं। आर्द्रभूमियों का क्षरण, प्रदूषण, अनियंत्रित तटीय विकास, औद्योगिक गतिविधियाँ, मानवीय हस्तक्षेप तथा जल गुणवत्ता में गिरावट इनके प्राकृतिक आवास को निरंतर प्रभावित कर रही है। जलवायु परिवर्तन भी इनके प्रवासन और प्रजनन चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य में AI-संचालित इको-नेचर पार्क की स्थापना पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक तकनीक और सतत विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह परियोजना न केवल फ्लेमिंगो एवं अन्य पक्षी प्रजातियों के संरक्षण को सशक्त बनाएगी, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से वन्यजीव निगरानी के क्षेत्र में भारत को नई पहचान भी दिलाएगी। साथ ही यह वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण जागरूकता, इको-टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण के लिये एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित होने की क्षमता रखती है।
