भारत ने वैश्विक समुद्री क्षेत्र (Maritime Sector) में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। BIMCO-ICS सीफ़ेयरर वर्कफ़ोर्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत अब दुनिया में समुद्री कर्मचारियों (Seafarers) का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। यह उपलब्धि न केवल भारत की समुद्री शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली की गुणवत्ता को दर्शाती है बल्कि वैश्विक शिपिंग उद्योग में देश की बढ़ती भूमिका का भी प्रमाण है।
विश्व व्यापार का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है। ऐसे में प्रशिक्षित और कुशल समुद्री कर्मचारियों की उपलब्धता किसी भी देश की समुद्री क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है।
BIMCO-ICS सीफ़ेयरर वर्कफ़ोर्स रिपोर्ट 2026 क्या बताती है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्तमान में 3,11,936 समुद्री पेशेवर (Seafarers) वैश्विक शिपिंग उद्योग को उपलब्ध करा रहा है। इसमें जहाजों पर कार्य करने वाले अधिकारी (Officers) और रेटिंग (Ratings) दोनों श्रेणियों के प्रशिक्षित कर्मचारी शामिल हैं।
यह संख्या भारत को दुनिया में समुद्री कर्मचारियों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनाती है।
वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का योगदान वैश्विक समुद्री कार्यबल का 12.16 प्रतिशत है।
इस सूची में:
- फिलीपींस पहले स्थान पर है।
- भारत दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है।
- भारत ने चीन, रूसी संघ (Russia) तथा इंडोनेशिया जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय समुद्री पेशेवरों की वैश्विक स्तर पर मांग लगातार बढ़ रही है।
अधिकारी वर्ग में भारत की विशेष मजबूती
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके समुद्री अधिकारी (Officers) हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कुल अधिकारी कार्यबल में भारत की हिस्सेदारी 13.41 प्रतिशत है।
जहाजों पर अधिकारी अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं जिनमें:
- जहाज का संचालन,
- नेविगेशन,
- इंजन प्रबंधन,
- सुरक्षा व्यवस्था,
- कार्गो संचालन,
- तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का पालन शामिल है।
भारतीय अधिकारियों की तकनीकी दक्षता और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण मानकों के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियां उन्हें प्राथमिकता दे रही हैं।
वैश्विक स्तर पर समुद्री कर्मचारियों की बढ़ती मांग
BIMCO-ICS रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में समुद्री कर्मचारियों की कुल उपलब्धता 2.57 मिलियन है जबकि उनकी मांग 2.55 मिलियन तक पहुंच चुकी है।
इसका अर्थ है कि वैश्विक शिपिंग उद्योग में प्रशिक्षित और योग्य समुद्री कर्मचारियों की उपलब्धता तथा मांग के बीच अंतर लगातार कम होता जा रहा है। विशेष रूप से योग्य अधिकारियों (Qualified Officers) की कमी पूरी दुनिया के समुद्री उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
यह स्थिति भविष्य में कुशल भारतीय समुद्री पेशेवरों के लिए रोजगार के और अधिक अवसर पैदा कर सकती है।
भारत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
भारत ने समुद्री क्षेत्र में अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
देश का उद्देश्य वैश्विक समुद्री कार्यबल में अपनी हिस्सेदारी 12.16 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
यदि यह लक्ष्य प्राप्त होता है तो भारत न केवल दुनिया का अग्रणी समुद्री मानव संसाधन प्रदाता बनेगा बल्कि वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में उसकी रणनीतिक भूमिका भी और अधिक मजबूत होगी।
भारत इस लक्ष्य को कैसे हासिल कर सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई मजबूत आधार मौजूद हैं।
1. तेजी से विकसित होता समुद्री शिक्षा तंत्र
- भारत में अनेक समुद्री प्रशिक्षण संस्थान (Maritime Training Institutes) अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण
- भारतीय समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम और प्रमाणन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुरूप हैं, जिससे भारतीय नाविकों और अधिकारियों को वैश्विक स्तर पर रोजगार प्राप्त करने में सुविधा मिलती है।
3. प्रगतिशील नीतिगत ढांचा
- भारत सरकार समुद्री क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई नीतियां लागू कर रही है। इससे समुद्री प्रशिक्षण, रोजगार और कौशल विकास को नई गति मिल रही है।
4. वैश्विक मांग को पूरा करने की क्षमता
- चूंकि विश्वभर में योग्य समुद्री अधिकारियों की कमी बनी हुई है, इसलिए भारत का प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल आने वाले वर्षों में इस मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत के लिए इस उपलब्धि का महत्व
भारत का दुनिया में समुद्री कर्मचारियों का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनना कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:
- वैश्विक समुद्री उद्योग में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
- भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।
- विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिलेगी।
- समुद्री शिक्षा और कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
- भारत की ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को मजबूती मिलेगी।
- वैश्विक लॉजिस्टिक्स और व्यापार में भारत की रणनीतिक भूमिका और मजबूत होगी।
