ग्वालियर में बनेगा भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, ₹3,500 करोड़ निवेश की उम्मीद

Sanjay Yadav
हाल ही में दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications - DoT) और मध्य प्रदेश सरकार ने ग्वालियर में भारत का पहला डेडिकेटेड टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (Telecom Manufacturing Zone - TMZ) स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को टेलीकॉम उपकरण निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

ग्वालियर में बनेगा भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, ₹3,500 करोड़ निवेश की उम्मीद

क्या है टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ)?

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) 350 एकड़ में विकसित किया जाने वाला एक आधुनिक इंडस्ट्रियल कैंपस होगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कोई भी कंपनी टेलीकॉम उत्पादों के निर्माण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया एक ही परिसर में पूरी कर सकेगी।

कंपनियां यहां केवल टेलीकॉम उपकरणों की असेंबली ही नहीं करेंगी बल्कि प्रोडक्ट का डिज़ाइन, ऑन-साइट लैब में टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सभी कार्य एक ही स्थान पर कर सकेंगी। यानी किसी भी चरण के लिए ज़ोन से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

"प्लग-एंड-प्ले" मॉडल पर होगा विकसित

TMZ का विकास "प्लग-एंड-प्ले" मॉडल के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि उद्योगों को पहले से तैयार बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा जिससे वे कम समय में अपना उत्पादन शुरू कर सकें।

इस परियोजना के संचालन के लिए एक स्पेशल पर्पज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा।
  • मध्य प्रदेश सरकार की हिस्सेदारी – 51%
  • दूरसंचार विभाग (DoT) की हिस्सेदारी – 49%
यह साझेदारी परियोजना के प्रभावी संचालन और प्रबंधन को सुनिश्चित करेगी।

टेलीकॉम उद्योग की पूरी वैल्यू चेन होगी शामिल

इस विशेष आर्थिक क्षेत्र में टेलीकॉम उद्योग से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन विकसित की जाएगी। यहां विभिन्न प्रकार के आधुनिक टेलीकॉम उत्पादों का निर्माण किया जाएगा जिनमें शामिल हैं:
  • मोबाइल हैंडसेट
  • ऑप्टिकल फाइबर केबल
  • एंटीना
  • राउटर
  • सैटेलाइट कम्युनिकेशन उपकरण
  • सेमीकंडक्टर चिप्स
इससे भारत में टेलीकॉम उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उत्पादन को नई गति मिलेगी।

₹3,500 करोड़ का निवेश और रोजगार के बड़े अवसर

इस महत्वाकांक्षी परियोजना से लगभग ₹3,500 करोड़ के निवेश की उम्मीद जताई गई है। साथ ही यह परियोजना राज्य में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के नए अवसर भी पैदा करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ज़ोन ग्वालियर को देश के प्रमुख टेलीकॉम विनिर्माण केंद्रों में शामिल कर सकता है और स्थानीय उद्योगों को भी नई पहचान देगा।

भारत के टेलीकॉम सेक्टर के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत का पहला डेडिकेटेड टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन देश के दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह परियोजना 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश और उत्पादन के लिए आकर्षित करने में भी यह ज़ोन अहम साबित हो सकता है।

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