भारत सरकार ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग (डिनॉमिनेशन) के पॉलीमर बैंकनोट लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह कदम भारतीय मुद्रा प्रणाली को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
₹10 और ₹20 के पॉलीमर बैंकनोटों का होगा फील्ड ट्रायल
RBI सबसे पहले ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलीमर बैंकनोट फील्ड ट्रायल के लिए जारी करेगा। इन नोटों का विभिन्न परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि वे व्यवहारिक उपयोग में कितने प्रभावी साबित होते हैं।
यदि यह फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो RBI इन दोनों मूल्यवर्गों में पॉलीमर बैंकनोटों को नियमित रूप से जारी करने पर विचार करेगा।
पॉलीमर बैंकनोट क्या हैं?
पॉलीमर बैंकनोट, जिन्हें आमतौर पर प्लास्टिक बैंकनोट भी कहा जाता है, पारंपरिक सूती (कॉटन) बैंकनोटों से अलग होते हैं। इन्हें विशेष प्रकार के पॉलीमर पदार्थ से बनाया जाता है जो सामान्य कागज़ी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होता है।
इन नोटों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये:
- गंदगी से कम प्रभावित होते हैं।
- नमी का बेहतर सामना करते हैं।
- आसानी से फटते नहीं हैं।
- लंबे समय तक उपयोग में बने रहते हैं।
इसी कारण इनकी उम्र पारंपरिक कागज़ी नोटों की तुलना में अधिक होती है।
पॉलीमर बैंकनोट अधिक सुरक्षित क्यों हैं?
पॉलीमर नोटों में अत्याधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स शामिल किए जाते हैं जिनकी नकल करना बेहद कठिन होता है। इससे नकली नोटों की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है और मुद्रा प्रणाली की सुरक्षा भी मजबूत होती है।
दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं पॉलीमर नोट
पॉलीमर करेंसी अपनाने वाला पहला देश ऑस्ट्रेलिया था जिसने वर्ष 1988 में इसकी शुरुआत की थी।
आज यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम सहित 60 से अधिक देश पूरी तरह या आंशिक रूप से पॉलीमर बैंकनोटों का उपयोग कर रहे हैं।
भारत ने पहले भी किया था पॉलीमर नोटों का परीक्षण
भारत में पॉलीमर बैंकनोटों का विचार नया नहीं है। वर्ष 2012 में RBI ने ₹10 के पॉलीमर बैंकनोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था।
यह परीक्षण अलग-अलग जलवायु वाले शहरों:
- कोच्चि
- मैसूरु
- जयपुर
- भुवनेश्वर
- शिमला में किया गया था।
हालांकि, उस समय ऑपरेशनल समस्याओं और ATM से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों के कारण इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
अब दूर हो चुकी हैं तकनीकी चुनौतियां
RBI के अनुसार, पहले सामने आने वाली अधिकांश तकनीकी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है। अब ATM मशीनें पॉलीमर बैंकनोटों को बिना किसी बड़ी परेशानी के पहचान और प्रोसेस कर सकती हैं। यही कारण है कि सरकार ने एक बार फिर इस दिशा में पहल करने का निर्णय लिया है।
यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?
1. भारत में नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है
- डिजिटल भुगतान और UPI की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद भारत में नकदी की मांग कम नहीं हुई है।
- वर्तमान में भारत में चलन में मौजूद करेंसी का कुल मूल्य रिकॉर्ड ₹42.86 ट्रिलियन तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.5% अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल भुगतान के साथ-साथ नकदी का महत्व भी बना हुआ है।
2. कागज़ी नोटों की छपाई और रखरखाव महंगा पड़ रहा है
- भारत में पारंपरिक बैंकनोटों की छपाई और रखरखाव पर भारी खर्च आता है।
- वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में भारत ने बैंकनोटों की छपाई पर ₹6,370 करोड़ से अधिक खर्च किए। इसके अलावा, लगभग 23.8 अरब खराब हो चुके बैंकनोटों को चलन से बाहर करना पड़ा।
ऐसे में अधिक टिकाऊ पॉलीमर बैंकनोट लंबे समय में लागत कम करने और मुद्रा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं।
