IACS के 150 साल: भारत के पहले राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान की गौरवशाली विरासत

Sanjay Yadav
वर्ष 2026 में इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ़ साइंस (Indian Association for the Cultivation of Science - IACS) अपनी स्थापना के 150 वर्ष पूरे कर रहा है। यह अवसर भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के इतिहास का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

IACS के 150 साल भारत के पहले राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान की गौरवशाली विरासत

IACS की स्थापना का विचार कैसे आया?

IACS की स्थापना का विचार सबसे पहले डॉ. महेंद्रलाल सरकार (1833–1904) ने प्रस्तुत किया था। वर्ष 1869 में उन्होंने 'कलकत्ता जर्नल ऑफ़ मेडिसिन' में प्रकाशित एक लेख के माध्यम से ऐसे संस्थान की आवश्यकता पर बल दिया जो भारतीयों द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए समर्पित हो।

उनका उद्देश्य था कि भारत में विज्ञान के क्षेत्र में स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा मिले और भारतीय वैज्ञानिकों को अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच उपलब्ध हो।

IACS की स्थापना

डॉ. महेंद्रलाल सरकार ने वर्ष 1876 में इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ़ साइंस (IACS) की स्थापना की। यह भारत का वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए समर्पित पहला राष्ट्रीय संस्थान था जिसकी स्थापना भारतीयों द्वारा और भारतीय वैज्ञानिकों के लिए की गई थी।

आज भी यह संस्थान देश में वैज्ञानिक अनुसंधान की समृद्ध परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

IACS कहाँ स्थित है?

IACS का मुख्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है। यह संस्थान देश के प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में से एक है और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शोध कार्य करता है।

संस्थान का संचालन और वित्तपोषण

IACS एक स्वायत्त सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान है। इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology - DST) तथा पश्चिम बंगाल सरकार संयुक्त रूप से वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।

संस्थान का संचालन गवर्निंग काउंसिल (Governing Council) द्वारा किया जाता है जो इसकी सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है। यही परिषद संस्थान की नीतियों, अनुसंधान दिशा और प्रशासनिक निर्णयों का निर्धारण करती है।

वैज्ञानिक अनुसंधान में IACS की विरासत

लगभग डेढ़ शताब्दी की अपनी यात्रा में IACS ने बौद्धिक जिज्ञासा, वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्र सेवा की ऐसी परंपरा स्थापित की है जिसने देश के अनेक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को प्रेरित किया है।

यह संस्थान आज भी विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और नई खोजों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

IACS से जुड़े महान वैज्ञानिक

IACS से कई विश्व-प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक जुड़े रहे हैं जिन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।

प्रो. सी. वी. रमन
  • प्रो. चंद्रशेखर वेंकट रमन (सी. वी. रमन) IACS से जुड़े सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में से एक हैं। उन्होंने रमन प्रभाव (Raman Effect) की खोज की जिसके लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह विज्ञान के क्षेत्र में किसी भारतीय वैज्ञानिक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
जगदीश चंद्र बोस
  • जगदीश चंद्र बोस रेडियो विज्ञान और पादप विज्ञान (Plant Science) के क्षेत्र में अग्रणी वैज्ञानिक थे। उनके शोध ने आधुनिक वायरलेस संचार और पौधों की संवेदनशीलता को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मेघनाद साहा
  • मेघनाद साहा ने प्रसिद्ध साहा आयनीकरण समीकरण (Saha Ionization Equation) विकसित किया। उन्हें भारत में आधुनिक वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना और वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में गिना जाता है।
सत्येंद्र नाथ बोस
  • सत्येंद्र नाथ बोस ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ मिलकर बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी (Bose-Einstein Statistics) का विकास किया। उनके नाम पर ही बोसॉन (Boson) कणों का नाम रखा गया जो आधुनिक भौतिकी का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

IACS का महत्व

IACS ने भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस संस्थान ने अनेक महान वैज्ञानिकों को मंच प्रदान किया और विज्ञान को समाज तथा राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का कार्य किया।

आज भी यह संस्थान नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों को प्रेरित करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है।

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