वीर बाल दिवस
भारत सरकार प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाती है। इस दिवस का उद्देश्य देश के उन अद्वितीय बाल वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है, जिन्होंने कम आयु में ही साहस, धर्मनिष्ठा, आत्मबल और त्याग का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा। यह दिन केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सत्य, साहस और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा देने का भी अवसर है। वीर बाल दिवस दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के सुपुत्र साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह एवं साहिबज़ादा फतेह सिंह के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। दोनों साहिबज़ादों ने अत्यंत कम आयु में ऐसा अद्भुत साहस और आत्मबल प्रदर्शित किया, जिसकी मिसाल विश्व इतिहास में विरले ही देखने को मिलती है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि आयु नहीं, बल्कि विचारों की दृढ़ता और सत्य के प्रति निष्ठा ही किसी व्यक्ति को महान बनाती है। जब उनकी शहादत हुई, उस समय साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह की आयु मात्र 9 वर्ष तथा साहिबज़ादा फतेह सिंह की आयु केवल 7 वर्ष थी। इतनी छोटी आयु में भी उन्होंने जिस धैर्य, निडरता…