खजुराहो नृत्य उत्सव को भारत सरकार ने मध्य प्रदेश कला परिषद के सहयोग से कब शुरू किया था?
A. 1997
B. 1990
C. 1975
D. 1981
उत्तर: C. 1975
खजुराहो नृत्य उत्सव भारत के सबसे प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य समारोहों में से एक है। यह उत्सव मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित विश्वविख्यात खजुराहो मंदिर समूह की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित है। इस उत्सव की शुरुआत भारत सरकार ने मध्य प्रदेश कला परिषद के सहयोग से वर्ष 1975 में की थी। इसका प्रमुख उद्देश्य भारत की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपराओं का संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार करना था।
खजुराहो के मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, उत्कृष्ट मूर्तिकला और सांस्कृतिक महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों का निर्माण मुख्यतः 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच चंदेल राजाओं द्वारा कराया गया था। मंदिरों की दीवारों पर अंकित नृत्य, संगीत, कला और जीवन के विविध रूप भारतीय संस्कृति की महान परंपरा का परिचय देते हैं। इन्हीं मंदिरों की भव्य पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला खजुराहो नृत्य उत्सव भारतीय शास्त्रीय नृत्य और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
इस उत्सव का आयोजन प्रत्येक वर्ष सामान्यतः फरवरी या मार्च के महीने में किया जाता है। एक सप्ताह तक चलने वाले इस सांस्कृतिक समारोह में देश के प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देते हैं। रात्रि के समय प्रकाश से जगमगाते खजुराहो मंदिरों के सामने होने वाले नृत्य प्रदर्शन दर्शकों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों पर्यटक और कला प्रेमी इस उत्सव को देखने आते हैं।
खजुराहो नृत्य उत्सव में भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूपों का प्रदर्शन किया जाता है। इनमें भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, ओडिसी, कथकली, मणिपुरी, मोहिनीअट्टम और सत्त्रिया जैसे नृत्य विशेष रूप से शामिल होते हैं। प्रत्येक नृत्य शैली भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। कलाकार अपनी भाव-भंगिमाओं, मुद्राओं, संगीत और अभिनय के माध्यम से भारतीय पौराणिक कथाओं, धार्मिक प्रसंगों तथा सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।
खजुराहो मंदिर समूह को वर्ष 1986 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा प्रदान किया गया। यह सम्मान इन मंदिरों की वैश्विक ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है। खजुराहो नृत्य उत्सव इस विश्व धरोहर की पहचान को और अधिक सशक्त बनाता है तथा भारतीय कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मध्य प्रदेश कला परिषद इस उत्सव के आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाती है। परिषद कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने, भारतीय शास्त्रीय कलाओं को प्रोत्साहित करने तथा नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करती है। समय-समय पर इस उत्सव में सांस्कृतिक प्रदर्शनियों, हस्तशिल्प मेलों, कला प्रदर्शनियों तथा स्थानीय लोककलाओं का भी आयोजन किया जाता है, जिससे पर्यटकों को भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों को निकट से जानने का अवसर मिलता है।
पर्यटन की दृष्टि से भी खजुराहो नृत्य उत्सव अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन के कारण मध्य प्रदेश के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलता है, स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं तथा होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय व्यवसायों को लाभ होता है। यह उत्सव भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है क्योंकि विदेशी पर्यटक और कलाकार भारतीय कला एवं परंपरा से परिचित होते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में खजुराहो नृत्य उत्सव से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। जैसे— इसकी शुरुआत किस वर्ष हुई, इसका आयोजन कहाँ होता है, इसका आयोजन कौन करता है, यह किस राज्य में आयोजित होता है, खजुराहो मंदिरों का निर्माण किस वंश ने कराया, इन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में कब शामिल किया गया तथा यहाँ कौन-कौन से शास्त्रीय नृत्यों का प्रदर्शन किया जाता है। इसलिए इस विषय का अध्ययन सामान्य ज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
National GK की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह तथ्य विशेष रूप से याद रखने योग्य है कि खजुराहो नृत्य उत्सव की शुरुआत भारत सरकार ने मध्य प्रदेश कला परिषद के सहयोग से वर्ष 1975 में की थी। यह उत्सव भारतीय शास्त्रीय नृत्य, सांस्कृतिक विरासत, स्थापत्य कला और पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है तथा भारत की सांस्कृतिक पहचान को विश्व स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
