रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ेगा दबाव? अमेरिकी सीनेट ने नए प्रतिबंध बिल पर बढ़ाया कदम

Sanjay Yadav
अमेरिकी सीनेट ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026' को तेज़ी से पारित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मतदान किया है। यह विधेयक (बिल) रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि यह कानून लागू होता है तो इसका प्रभाव केवल रूस और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ेगा दबाव अमेरिकी सीनेट ने नए प्रतिबंध बिल पर बढ़ाया कदम

क्या है 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026'?

यह प्रस्तावित अमेरिकी कानून अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वह रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों पर 100% तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सके। इस कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय को कम करना है जिससे वह यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने में कमजोर हो।

किन देशों पर पड़ सकता है प्रभाव?

रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में निम्नलिखित देश शामिल हैं:
  • भारत
  • चीन
  • स्लोवाकिया
  • हंगरी
  • अज़रबैजान
यदि यह कानून लागू होता है तो इन देशों से अमेरिका में आने वाले कुछ उत्पादों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

हर 180 दिनों में होगी समीक्षा

बिल के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (U.S. Trade Representative) को हर 180 दिनों में रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों की समीक्षा करनी होगी। यदि किसी देश द्वारा रूस से ऊर्जा आयात में कमी या वृद्धि होती है तो उसके आधार पर टैरिफ दरों में बदलाव किया जा सकेगा।

इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बदलती वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों के अनुसार प्रतिबंधों को समय-समय पर संशोधित किया जा सके।

किन देशों को मिलेगी छूट?

इस बिल में कुछ देशों के लिए राहत का भी प्रावधान किया गया है। यदि कोई देश अपनी कुल प्राकृतिक गैस का 15% से कम हिस्सा रूस से आयात करता है और साथ ही रूसी गैस पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है तो उसे इस कानून के तहत टैरिफ से छूट मिल सकती है।

ईरान पर भी सख्त रुख

यह विधेयक केवल रूस तक सीमित नहीं है। इसमें 'ईरान सैंक्शन्स एक्ट' को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके लागू होने पर वर्ष 2031 तक ईरान पर लगाए गए महत्वपूर्ण सेकेंडरी प्रतिबंध प्रभावी बने रहेंगे।

इसके अलावा, यह कानून अमेरिकी सरकार को ईरान के ऊर्जा (Energy) और हथियार (Weapons) क्षेत्रों को मिलने वाली फंडिंग रोकने के उद्देश्य से मौजूदा प्रतिबंध लगाने के अधिकार को और मजबूत करने की अनुमति देता है।

इस बिल के पीछे क्या तर्क है?

बिल का समर्थन करने वाले सांसदों का कहना है कि रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय ही उसकी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है। उनका मानना है कि यदि रूस के तेल और गैस निर्यात से मिलने वाली कमाई को कम किया जाए तो यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की उसकी क्षमता कमजोर होगी। इसी उद्देश्य से रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाने का प्रावधान किया गया है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

भारत रूस से कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार रहा है। यदि यह कानून पूरी तरह लागू होता है तो भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह अभी एक प्रस्तावित कानून है और इसके अंतिम स्वरूप, लागू होने की प्रक्रिया तथा संभावित छूटों पर आगे भी राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा होने की संभावना है।

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