AI कंटेंट पर EU का बड़ा फैसला: 2 अगस्त से लेबलिंग होगी अनिवार्य

Sanjay Yadav
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के साथ ऑनलाइन दुनिया में यह पहचानना कठिन होता जा रहा है कि कौन-सा कंटेंट वास्तविक है और कौन-सा AI द्वारा तैयार या संशोधित किया गया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए 2 अगस्त से यूरोपीय संघ (EU) ने ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से AI से बने कंटेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य डिजिटल दुनिया में भरोसा बनाए रखना और लोगों को AI-निर्मित कंटेंट की स्पष्ट पहचान उपलब्ध कराना है।

AI कंटेंट पर EU का बड़ा फैसला 2 अगस्त से लेबलिंग होगी अनिवार्य

AI-जनरेटेड कंटेंट पर लेबलिंग का उद्देश्य

इस नियम का प्रमुख मकसद पारदर्शिता सुनिश्चित करना और इंसानी यूज़र्स को ऑनलाइन हेरफेर किए गए कंटेंट की पहचान करने में सक्षम बनाना है। यह प्रावधान यूरोपीय संघ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्ट (Artificial Intelligence Act-AIA) के आर्टिकल 50 के अंतर्गत आता है।

यह अधिनियम जोखिम-आधारित वर्गीकरण के आधार पर यूरोपीय संघ के भीतर AI सिस्टम के विकास, उपयोग और सप्लाई के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करता है। इसके साथ ही 'AI-जनरेटेड कंटेंट की पारदर्शिता पर प्रैक्टिस कोड' AI डेवलपर्स और कंटेंट प्रोवाइडर्स के लिए ऐसे दायित्व निर्धारित करता है जिनका उद्देश्य सूचना तंत्र (Information Ecosystem) की अखंडता बनाए रखना है।

किन प्रकार के कंटेंट पर लागू होंगे नियम?

EU ने कंटेंट की लेबलिंग के लिए मुख्य रूप से दो श्रेणियों को शामिल किया है:

1. डीपफेक (Deepfake)
  • डीपफेक ऐसे इमेज, ऑडियो या वीडियो होते हैं जो वास्तविक लोगों, स्थानों या घटनाओं जैसे दिखाई देते हैं लेकिन उन्हें AI की सहायता से बनाया गया होता है या उनमें हेरफेर किया गया होता है। ऐसे कंटेंट सामान्य उपयोगकर्ताओं को वास्तविक प्रतीत हो सकते हैं।
2. हेरफेर किया गया टेक्स्ट (Manipulated Text)
  • इस श्रेणी में वह टेक्स्ट शामिल है जिसे जनता तक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रकाशित किया गया हो लेकिन जिसकी इंसानों द्वारा समीक्षा (Human Review) नहीं की गई हो।

AI डेवलपर्स और कंटेंट प्रोवाइडर्स की जिम्मेदारियां

प्रैक्टिस कोड के तहत AI सिस्टम डेवलपर्स और कंटेंट प्रोवाइडर्स के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे ऐसे स्पष्ट, आसानी से दिखाई देने वाले और पहचानने योग्य संकेत (Labels) प्रदर्शित करें जिससे यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित कंटेंट या प्रोडक्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से तैयार किया गया है।

किन मामलों में छूट दी गई है?

EU के नियमों में कुछ विशेष परिस्थितियों में लेबलिंग से छूट भी प्रदान की गई है:
  • ऐसे डीपफेक जो स्पष्ट रूप से कलात्मक, व्यंग्यात्मक या काल्पनिक (Fictional) रचनाओं का हिस्सा हों।
  • कानून द्वारा अधिकृत वह कंटेंट जिसका उद्देश्य आपराधिक अपराधों का पता लगाना, उन्हें रोकना, उनकी जांच करना या अभियोजन चलाना हो।
  • AI द्वारा तैयार किया गया ऐसा टेक्स्ट जिसकी इंसानों ने समीक्षा की हो या जो संपादकीय नियंत्रण (Editorial Control) के अंतर्गत हो तथा जिसके लिए कोई कानूनी रूप से उत्तरदायी व्यक्ति जवाबदेह हो।

कंटेंट लेबलिंग के लिए तीन प्रकार के आइकन

EU ने AI कंटेंट की पहचान के लिए तीन अलग-अलग प्रकार के लेबल निर्धारित किए हैं:
  • AI आइकन – जब AI तकनीक केवल किसी प्रोडक्ट के निर्माण की प्रक्रिया में सहायक रही हो।
  • AI Generated आइकन – जब पूरा कंटेंट AI द्वारा तैयार किया गया हो और प्रॉम्प्ट देने के अलावा उसमें किसी मानव का योगदान न हो।
  • AI Modified आइकन – जब पहले से मौजूद मानव-निर्मित कंटेंट में AI टूल्स की सहायता से संशोधन या हेरफेर किया गया हो।
इन आइकनों का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को तुरंत यह समझने में मदद करना है कि वे किस प्रकार के AI-संबंधित कंटेंट को देख रहे हैं।

भारत और EU के नियमों में अंतर

भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही AI-जनित कंटेंट की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं लेकिन उनकी नियामक रणनीतियों में महत्वपूर्ण अंतर है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने वर्ष 2026 में आईटी नियम, 2021 में संशोधन अधिसूचित किया जिसके तहत सिंथेटिक रूप से बनाई गई जानकारी (Synthetic Generated Information-SGI) को स्पष्ट रूप से लेबल करना आवश्यक किया गया ताकि उपयोगकर्ता उसकी पहचान कर सकें।

हालांकि, दोनों व्यवस्थाओं में जिम्मेदारी तय करने का तरीका अलग है:

EU के नियम AI सिस्टम विकसित करने वालों और कंटेंट प्रोवाइडर्स पर लेबल लगाने की जिम्मेदारी डालते हैं।
भारत का दृष्टिकोण मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और उपयोगकर्ताओं पर केंद्रित है जहां जानकारी देने की जिम्मेदारी उपयोगकर्ताओं पर डाली जाती है तथा नियमों के अनुपालन के लिए प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भरता रहती है।

EU का उद्देश्य AI सिस्टम में जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करना है ताकि जिम्मेदारीपूर्वक कंटेंट का निर्माण हो सके। इसके विपरीत, भारत मुख्य रूप से अंतिम प्रकाशित कंटेंट (Final Product) को रेगुलेट करने की दिशा में कार्य करता है और IT नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने का प्रावधान करता है।

इसके अतिरिक्त, EU ने क्रिएटिव और कलात्मक कंटेंट के लिए विशेष छूट प्रदान की है तथा मानव समीक्षा को पर्याप्त महत्व दिया है जबकि भारत के नियम अपेक्षाकृत सामान्य हैं और इस प्रकार की विशिष्ट छूट का प्रावधान नहीं करते।

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