सल्तनत काल में ‘हक-ए-शर्ब’ क्या था?
सल्तनत काल में ‘हक-ए-शर्ब’ सिंचाई कर था। मध्यकालीन भारत में कृषि केवल जीविका का साधन ही नहीं थी बल्कि राज्य की आर्थिक रीढ़ भी थी। दिल्ली सल्तनत (13वीं से 16वीं शताब्दी) के शासकों ने कृषि उत्पादन को बढ़ाने और उससे राजस्व सुनिश्चित करने के लिए भूमि-राजस्व, सिंचाई-व्यवस्था तथा कर-प्रणाली का विस्तृत ढांचा विकसित किया। इस ढांचे में ‘हक-ए-शर्ब’ एक महत्वपूर्ण सिंचाई कर के रूप में सामने आता है। यह कर उन कृषकों से लिया जाता था जो राज्य द्वारा निर्मित या नियंत्रित सिंचाई स्रोतों जैसे नहरों, बांधों, जलाशयों से जल का उपयोग करते थे। सल्तनत काल की कृषि अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त परिचय सल्तनत काल की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि-आधारित थी। शहरीकरण, सेनाओं के भरण-पोषण और दरबारी खर्चों के लिए स्थिर राजस्व आवश्यक था जो कृषि से ही प्राप्त होता था। मुख्य विशेषताएँ: कृषि भूमि का व्यापक विस्तार नई फसलों और सिंचाई तकनीकों का प्रयोग भूमि-राजस्व के साथ सहायक करों का विकास इसी संदर्भ में सिंचाई की उपलब्धता उत्पादन बढ़ाने का प्रमुख साधन बनी और जहाँ राज्य ने सिंचाई सुविधाएँ प्रदान कीं वहाँ उनसे संबंधित करों का निर्धारण हुआ। …