ग्लासगो में मीराबाई चानू का गोल्डन कमाल! भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का पहला गोल्ड

Sanjay Yadav
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) में भारत ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए भारोत्तोलन (Weightlifting) प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया। भारतीय खिलाड़ियों ने पहले ही दिन देश को स्वर्ण और रजत पदक दिलाकर यह संकेत दे दिया कि इस बार भी भारत पदक तालिका में मजबूत दावेदार रहेगा। अनुभवी स्टार वेटलिफ्टर सैखोम मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया जबकि चनंबम रिशिकांता सिंह और राजा मुथुपांडी ने क्रमशः पुरुषों की 60 किलोग्राम और 65 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर भारत की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ग्लासगो में मीराबाई चानू का गोल्डन कमाल! भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का पहला गोल्ड

मीराबाई चानू ने दिलाया भारत को पहला स्वर्ण पदक

मणिपुर की प्रसिद्ध भारोत्तोलक और टोक्यो ओलंपिक 2020 की रजत पदक विजेता सैखोम मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम श्रेणी में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 190 किलोग्राम भार उठाया। उन्होंने स्नैच में 85 किलोग्राम तथा क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम भार उठाकर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष रही क्योंकि यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला स्वर्ण पदक था। मीराबाई ने अपने अनुभव और तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा।

तीन रिकॉर्ड एक साथ किए ध्वस्त

मीराबाई चानू ने केवल स्वर्ण पदक ही नहीं जीता बल्कि उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान तीन नए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित किए। उन्होंने:
  • स्नैच में नया रिकॉर्ड बनाया।
  • क्लीन एंड जर्क में नया रिकॉर्ड बनाया।
  • कुल भार उठाने (Total Lift) का भी नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
यह प्रदर्शन दर्शाता है कि मीराबाई चानू आज भी विश्व की सर्वश्रेष्ठ महिला भारोत्तोलकों में शामिल हैं।

लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण

मीराबाई चानू ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया।
  • गोल्ड कोस्ट 2018 – स्वर्ण पदक
  • बर्मिंघम 2022 – स्वर्ण पदक
  • ग्लासगो 2026 – स्वर्ण पदक
इसके अतिरिक्त उन्होंने ग्लासगो 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक भी जीता था। इस प्रकार चार लगातार कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाली भारत की सबसे सफल महिला भारोत्तोलकों में उनका नाम शामिल हो गया है।

चनंबम रिशिकांता सिंह ने जीता रजत पदक

भारत के लिए दूसरा पदक मणिपुर के चनंबम रिशिकांता सिंह ने पुरुषों की 60 किलोग्राम भार वर्ग में दिलाया। उन्होंने कुल 264 किलोग्राम भार उठाकर शानदार प्रदर्शन किया और रजत पदक अपने नाम किया।

रिशिकांता सिंह ने पूरे मुकाबले में शानदार संतुलन और तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया। उनके इस प्रदर्शन से स्पष्ट है कि भारत की नई पीढ़ी के भारोत्तोलक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

राजा मुथुपांडी ने बढ़ाया भारत का गौरव

तमिलनाडु के प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर राजा मुथुपांडी ने पुरुषों की 65 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को एक और रजत पदक दिलाया। उन्होंने कुल 286 किलोग्राम भार उठाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया।

राजा मुथुपांडी का यह प्रदर्शन भारत के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा क्योंकि इससे भारत की पदक तालिका में एक और रजत पदक जुड़ गया तथा भारोत्तोलन में भारत की मजबूत स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई।

भारोत्तोलन में भारत की मजबूत परंपरा

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारोत्तोलन हमेशा से भारत का सबसे सफल खेलों में से एक रहा है। भारतीय खिलाड़ी वर्षों से इस प्रतियोगिता में लगातार पदक जीतते रहे हैं। मीराबाई चानू, जेरेमी लालरिनुंगा, अचिंता शुली, संकेत सरगर और कई अन्य खिलाड़ियों ने पिछले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को गौरवान्वित किया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी भारतीय भारोत्तोलकों ने शुरुआती प्रदर्शन से यह स्पष्ट कर दिया कि वे आने वाले मुकाबलों में और अधिक पदक जीतने की क्षमता रखते हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का इतिहास

भारत ने पहली बार वर्ष 1934 में लंदन कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया था। हालांकि शुरुआती वर्षों में भारत की भागीदारी सीमित रही लेकिन धीरे-धीरे भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

भारत का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक रशीद अनवर ने कुश्ती (Wrestling) में कांस्य पदक जीतकर दिलाया था। यह भारतीय खेल इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।

भारत का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक महान धावक मिल्खा सिंह ने 1958 कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में 440 यार्ड दौड़ जीतकर हासिल किया था। यह भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय माना जाता है।

भारत की बढ़ती खेल शक्ति

पिछले दो दशकों में भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। शूटिंग, कुश्ती, मुक्केबाज़ी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और भारोत्तोलन जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अनेक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

ग्लासगो 2026 में मीराबाई चानू, रिशिकांता सिंह और राजा मुथुपांडी की उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की खेल संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है और युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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